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Tuesday, January 17, 2012

Fwd: [Social Equality] आज का दलित नेतृत्व बाबासाहब अम्बेडकर से अपनी...



---------- Forwarded message ----------
From: Dinesh Tripathi <notification+kr4marbae4mn@facebookmail.com>
Date: 2012/1/17
Subject: [Social Equality] आज का दलित नेतृत्व बाबासाहब अम्बेडकर से अपनी...
To: Social Equality <wearedalits@groups.facebook.com>


Dinesh Tripathi posted in Social Equality.
आज का दलित नेतृत्व बाबासाहब अम्बेडकर से अपनी...
Dinesh Tripathi 5:05pm Jan 17
आज का दलित नेतृत्व बाबासाहब अम्बेडकर से अपनी तुलना तो करना चाहता है परन्तु उन जैसा आदर्श नहीं स्थापित करना चाहता। वर्तमान दलित नेतृत्व, बातें तो दलित समाज के हितों की करता है परन्तु उसका ध्यान अपने, अपने परिवार के व अपने आसपास के लोगों को लाभ पहुंचाने तक ही केंद्रित रहता है। जब तक बाबू जगजीवन राम को उत्तर भारत के दलितों का नेता माना जाता रहा, उस समय तक तो दलित राजनीति में गांधीवाद तथा सादगी के दर्शन हो भी जाया करते थे। परन्तु जब से राम विलास पासवान, कांशीराम व मायावती जैसे आधुनिक सोच रखने वाले नेताओं ने दलित राजनीति को नेतृत्व प्रदान करने का जिम्मा उठाया तब से तो दलित नेतृत्व में, उसके रहन सहन, जीवनशैली, नेतृत्व प्रदान करने की निराली सोच, शानो-शौकत आदि में क्रांतिकारी परिवर्तन देखा जाने लगा। ऐसा नहीं है कि उच्चस्तरीय रहन सहन उनका अधिकार नहीं है या उनकी इस उच्चस्तरीय जीवनशैली से भारतीय समाज के किसी वर्ग को ईर्ष्या है।भारत के दो प्रमुख राज्य उत्तर प्रदेश व बिहार में मायावती तथा राम विलास पासवान जैसे दो ऐसे नेता देखे जा सकते हैं जोकि अपनी राजनीति तो दलितों के नाम पर करते हैं परन्तु दलितों के उत्थान, विकास अथवा उनके रहन-सहन को ऊंचा उठाने से अधिक इनका ध्यान अपने जीवन स्तर को तथा अपने रहन-सहन की शैली को ऊंचा करने में केंद्रित रहता है। कुछ वर्ष पूर्व तक राम विलास पासवान का ड्राइंग रूप अन्य सभी केंद्रीय नेताओं में सबसे आलीशान हुआ करता था। उनके इस शाही वैभव के प्रदर्शन के विषय में जब उनसे पूछ गया तो उन्होंने प्रश्ा* के जवाब में प्रश्ा* ही किया था कि क्या दलित नेता को अपना रहन-सहन ऊंचा रखने का अधिकार नहीं है.

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Palash Biswas
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