Follow palashbiswaskl on Twitter

PalahBiswas On Unique Identity No1.mpg

Unique Identity Number2

Please send the LINK to your Addresslist and send me every update, event, development,documents and FEEDBACK . just mail to palashbiswaskl@gmail.com

Website templates

Zia clarifies his timing of declaration of independence

What Mujib Said

Jyoti Basu is dead

Dr.BR Ambedkar

Memories of Another day

Memories of Another day
While my Parents Pulin babu and Basanti Devi were living

Monday, August 19, 2013

Rajiv Nayan Bahuguna मेरे संपादक , मेरे संतापक ---२१ क़ैद सही हैपर उसमें ज़ंजीर का आहन चुभता है

मेरे संपादक , मेरे संतापक ---२१

क़ैद सही हैपर उसमें ज़ंजीर का आहन चुभता है 
------------------------------------------------
करीब पंद्रह मिनट तक यह झक बाज़ी होती देख विमान के दरवाज़े पर बैठे पायलट सरदार जी ने हस्तक्षेप किया - " ओये , क्या मंदी गल कित्ता तुसी . मई अपने इसी जहाज़ पर कयी उग्रवादियों तक को ढो चूका हूँ , तब भी ऐसा ड्रामा नहीं देखा . यासीन मालिक को श्रीनगर से मई ही उठा लाया था . क्या ज़रुरत है इन पुलिस वालों की ? छोडो इनको और इन दोनों बन्दों को बाबा जी के साथ आने दो . मई ऐसे भी किसी हथियार बंद आदमी को जहाज़ पर नहीं बैठने दूंगा . एस डी एम् किंकर्तव्यविमूढ़ होकर एक किनारे जाकर वाकी टाकी से कहीं बात करने लगा . ज्यादा देर करना उसे भारी पड सकता था . कुछ ही देर पहले ओ एन जी सी का एक अन्य विशेष विमान वहां उतरा तो उसके सभी सवार अधिकारियों ने मेरे पिता को घेर लिया , और पुलिस - प्रशासन को जैम कर कोसने लगे . उन्हीं में से एक ने डिटाल ला कर मेरे पिता के ज़ख्मों पर लगाया . मज़्बूओर एस डी एम् ने हमें भी गिरफ्तार कर लिया , क्योंकि इसके सिवा हमें साथ ले जाने का कोई रास्ता नहीं था .कानूनी पेच फंस सकता था . विमान में चढ़ते ही दोनों पायलटों ने मेरे पिता के चरण स्पर्श किये . इन दोनों सरकारी कर्मचारियों की " नमक हरामी " पर एस डी एम् हैरान था . वह एक राजद्रोही कैदी के चरणों में अवनत हो रहे थे .एक पायलट सरदार जी थे और दुसरे गले में क्रास लटकाए क्रिश्चियन . विमान में सम्मान सहित बैठने लायक चार ही सीटें थीं . बाकी पीछे एक लम्बी आड़ी सीट सामान रखने या भृत्यों के बैठने के लिए थी . एस डी एम् ने मुझे और मेरे मित्र को उस नौकरों वाली सीट पर बैठने का इशारा किया . मित्र ने उसे धकियाया और हम दोनों ने प्रतिष्ठित सीट ले ली . धक्का खाकर एस डी एम् जवाबी हमला करने को उद्यत हुआ तो पायलट ने धमकाया - अभी ए टी सी को बताता हूँ की टिहरी से बाबा जी के साथ आया एडमिनिस्ट्रेशन का बन्दा जहाज़ में हंगामा कर रहा है . एस डी एम् घबराकर मेरे पिता की बगल में बैठ गया . उसे समझ आ गया था की अब उसका राज ख़त्म हो चूका है , और विमान में पायलेट ही मजिस्ट्रेट है . हाथा पायी की नौबत एक बार फिर आई , जब मित्र ने उसके हाथ से अखबार छीन लिया , जो सरदार जी दिल्ली से लाएथे . सरदार जी ने फिर उसे धमकाया - ओये नहीं मानेगा न तू ? विमान अपनी वांछित ऊंचाई हासिल कर चुका था , और डाक्टर तथा डी एस पी नौकरों वाली सीट ग्रहण कर चुके थे . शाही कैदियों को लेकर जा रहे इस दल में अगर कोई तनाव मुक्त था , तो वह थे विमान के दोनों पायलेट 
( जारी )

No comments: