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Tuesday, March 6, 2012

पश्चिमी उप्र ने बचाई बसपा की लाज

पश्चिमी उप्र ने बचाई बसपा की लाज


Wednesday, 07 March 2012 09:36

जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली, 7 मार्च। पूर्वांचल में भले बसपा ने बुरी तरह मुंह की खाई है पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनाव नतीजे उसके लिए उतने खराब नहीं रहे हैं। बिजनौर जिले की आठ में से चार सीटें बसपा को मिल गई हैं। पिछले चुनाव में जिले में कुल सात सीटें थीं और सारी बसपा ने जीती थीं। बिजनौर भी मायावती का अपना जिला रहा है, जहां से उन्होंने 1989 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीता था। बिजनौर से ओपी गुप्ता के मुताबिक यहां मुसलमान-दलित समीकरण कामयाब हो गया और बसपा के ओम कुमार सिंह (नहटौर), इकबाल ठेकेदार (चांदपुर), तसलीम अहमद (नजीबाबाद) और मुहम्मद गाजी (बढ़ापुर) पार्टी के खिलाफ चली आंधी के बावजूद जीत गए। 
कांग्रेस ने रालोद के सहारे यहां चमत्कार की उम्मीद लगाई थी पर इस गठबंधन का खाता भी नहीं खुल पाया। बची चार सीटों में बिजनौर से भाजपा के भारतेंद्र और नूरपुर से लोकेंद्र चौहान जीते, तो धामपुर से सपा के मूलचंद और नगीना से इसी पार्टी के मनोज पारस के सिर जीत का सेहरा बंधा। पर मायावती इसे लेकर संतोष कर सकती हैं कि जिन चार सीटों पर उनके उम्मीदवार हारे हैं, वहां भी दूसरे नंबर पर बसपा ही आई है।
मायावती का एक समय में सहारनपुर से भी खासा लगाव था। जिले की हरौड़ा सीट से उन्होंने विधानसभा चुनाव जीता था। इस बार भी इस जिले ने बसपा की लाज बचा दी। पिछले चुनाव में पार्टी ने पांच सीटें जीती थीं। इस बार उसे केवल एक सीट का ही घाटा हुआ है। देवबंद से सुरेंद्र सिंघल के मुताबिक नकुड़ में बसपा के मंत्री धरम सिंह सैनी ने कांग्रेस उम्मीदवार इमरान मसूद को हरा दिया। इमरान सपा छोड़ कर कांग्रेस में आए रशीद मसूद के भतीजे हैं। इस सीट पर सबसे ज्यादा 77 फीसद मतदान हुआ था पर ज्यादा मतदान बसपा के हक में गया।
बेहट सीट पर सबकी निगाहें थीं। मुलायम ने यहां जामा मस्जिद के शाही इमाम के दामाद उमर अली खान को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन वे बसपा के महावीर राणा से हार गए। उन्हें तीसरा स्थान मिल पाया क्योंकि दूसरे स्थान पर कांग्रेस के नरेश सैनी रहे। 
देवबंद में सपा के राजेंद्र राणा, गंगोह में कांग्रेस के प्रदीप चौधरी, सहारनपुर देहात में बसपा के जगपाल सिंह और रामपुर मनिहारान में भी बसपा के ही रविंद्र गोल्हू फिर जीत गए। सहारनपुर शहर में भाजपा के मौजूदा विधायक राघव लखनपाल ने फिर जीत कर अपनी पार्टी की लाज बचा दी। मुरादाबाद में कांठ सीट पर पीस पार्टी के अनीसुर रहमान ने बसपा के विधायक रिजवान को हरा कर सबको चौंका दिया। सपा इस मुसलमान बहुल सीट पर तीसरे नंबर पर आई। 
मुरादाबाद से नरेश भारद्वाज के मुताबिक मुरादाबाद और भीम नगर जिलों की कुल नौ सीटों में से सात जीत कर सपा ने चमत्कार कर दिखाया। यहां तक कि मुरादाबाद शहर में भी सपा के यूसुफ अंसारी ने भाजपा के रितेश गुप्ता को हरा दिया। पिछले चुनाव में यहां सपा के संदीप अग्रवाल जीते थे। पर सत्ता के लालच में वे बाद में बसपा में चले गए थे। मतदाताओं ने उन्हें मौकापरस्ती की सियासत का दंड दे दिया। जबकि मुरादाबाद देहात में शकीमुल हक (सपा), चंदौसी में लक्ष्मी गौतम (सपा), असमोली में पिंकी यादव (सपा), बिलारी में मोहम्मद इरफान (सपा) और कुंदरकी में हाजी रिजवान (सपा) ने सफलता हासिल की। सर्वेश कुमार सिंह ने इकलौती ठाकुरद्वारा सीट जीत कर भाजपा का खाता जरूर खोल दिया। 
इस चुनाव में सबसे करारा झटका केंद्रीय मंत्री अजित सिंह को लगा है। मौकापरस्ती की राजनीति के उस्ताद अजित सिंह खुद तो डूबे ही, कांग्रेस का भी बंटाधार कर दिया। उन्हें कांग्रेस ने 47 सीटें दी थीं। दो सीटों पर वे कांग्रेसी उम्मीदवारों के खिलाफ भी लड़े। पर अपने ही गढ़ में बसपा से बुरी तरह हारे। बागपत में उनके उम्मीदवार छह बार के विजेता कोकब हमीद को बसपा की हेमलता गुर्जर ने हरा कर इतिहास रच दिया।
बरनावा की जगह बनी नई जाट बहुल बड़ौत सीट भी अजित सिंह खो बैठे। यहां भी बसपा के लोकेश दीक्षित जीत गए। अजित सिंह के संसदीय क्षेत्र बागपत की ही सिवाल खास सीट भी सपा के गुलाम मोहम्मद ने झटक ली। केवल छपरौली का अपना गढ़ ही वे बचा पाए। 
मेरठ जिले में भाजपा का कमल खूब खिला। यहां पहले पार्टी की एक सीट थी। इस बार उसे चार सीटों पर सफलता मिली है। मेरठ शहर में पार्टी के लक्ष्मीकांत वाजपेयी, सरधना में संगीत सोम, मेरठ कैंट में सत्यप्रकाश अग्रवाल और मेरठ दक्षिण में रवींद्र भडाना जीत गए। बड़बोले और विवादास्पद विधायक याकूब कुरैशी रालोद टिकट पर सरधना में हारे तो मेरठ शहर में उनके बड़े भाई कांग्रेस के यूसुफ कुरैशी भी नहीं जीत पाए। सत्यप्रकाश अग्रवाल ने मेरठ कैंट सीट पर जीत की हैट्रिक बनाई है। इस सीट पर 1989 से लगातार भाजपा ही काबिज है। सपा के मौजूदा विधायक शाहिद मंजूर किठौर में फिर जीत गए। 

लेकिन पूर्वांचल में साइकिल की रफ्तार के आगे न हाथी टिका और न कांग्रेस का पंजा। यहां कांग्रेस के सांसद संजय सिंह के बावजूद सभी सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार जमानत तक नहीं बचा पाए। सुल्तानपुर से राज खन्ना के मुताबिक सपा के अनूप संडा (शहर), अरुण वर्मा (सदर) और इसोली में   सपा के अबरार अहमद जीत गए। यहां पीस पार्टी के उम्मीदवारों का प्रदर्शन कांग्रेस से बेहतर रहा। हार कर भी ज्यादातर सीटों पर बसपा ही दूसरे नंबर पर रही। फैजाबाद से त्रियुग नारायण तिवारी के मुताबिक सपा ने यहां भी चार सीटें जीत लीं। भाजपा को केवल रुदौली की इकलौती सीट ही उसके उम्मीदवार रामचंद्र यादव की कृपा से मिल पाई। अयोध्या में लल्लू सिंह सपा के तेज नारायण पांडे से हार गए। 
बसपा के गढ़ अंबेडकर नगर जिले की पांचों सीटें सपा ने जीती हैं। बरेली से शंकरदास  के मुताबिक यहां नौ में से एक तिहाई सीटों पर भाजपा का कमल खिल गया। इतनी ही सीटें सपा ने और दो बसपा ने जीती हैं। लोकसभा सीट पर काबिज कांग्रेस का यहां खाता भी नहीं खुल पाया। उससे अच्छा प्रदर्शन तो मिल्ली काउंसिल ने कर दिखाया। भाजपा को आंवला, बरेली शहर और बरेली कैंट में सफलता मिली है। जबकि सपा ने बहेड़ी, फरीदपुर और नवाबगंज सीटें जीती हैं। बसपा को बिथरी चैनपुर और मीरगंज सीटें ही मिली हैं। जिस शहजिल इस्लाम का मायावती ने टिकट काटा था वह भौजीपुरा में मिल्ली काउंसिल से जीत गया।
रायबरेली में बिटिया प्रियंका का नारा इस बार विफल हो गया। सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र की पांचों सीटें पार्टी हार गई। शहर सीट पर, जहां पीस पार्टी के अखिलेश सिंह लगातार पांचवीं बार जीत गए वहीं बाकी चारों सीटें सपा ने कांग्रेस से झटक लीं। 
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ही मुजफ्फर नगर जिले में भी बसपा ने आठ में से तीन सीटें जीती हैं। यहां शहर सीट पर भाजपा के मौजूदा विधायक अशोक कंसल को सपा के चितरंजन स्वरूप ने हरा दिया। पर पुरकाजी, चरथावल और मीरापुर में बसपा जीत गई। हरियाणा से उत्तर प्रदेश आकर किस्मत आजमाने वाले चर्चित दलबदलू कर्तार सिंह भडाना की किस्मत इस बार खतौली में साथ दे गई। रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ कर उन्होंने बसपा के ताराचंद शास्त्री को हरा दिया। भाजपा के दिग्गज हुकुम सिंह ने कैराना सीट फिर जीती है। वे विधानसभा में अभी पार्टी के उप नेता हैं। कांग्रेस को यहां शामली में सफलता मिल गई। उसके बघरा के मौजूदा विधायक पंकज मलिक फिर जीत गए। परिसीमन में बघरा खत्म हो गई थी। मुजफ्फर नगर से संजीव वर्मा के मुताबिक जिले में सपा को दूसरी सीट बुढाना की मिली है। 
गाजीपुर की सात में से छह सीटें सपा ने जीती हैं। जबकि सातवीं मोहम्मदाबाद सीट पर कौमी एकता दल के शिवगतुल्ला अंसारी जीते हैं, जो पूर्वांचल के चर्चित बाहुबली मुख्तार अंसारी के भाई हैं। दोनों भाइयों ने अपनी अलग कौमी एकता पार्टी बना कर चुनाव लड़ा था क्योंकि सपा और बसपा दोनों ने उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया था। जयप्रकाश भारती के मुताबिक पिछले चुनाव में यहां बसपा को पांच और सपा को दो सीटें मिली थीं। मथुरा से अशोक बंसल के मुताबिक यहां अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी का जादू खूब चला। 
कांग्रेस ने जहां मथुरा शहर की अपनी सीट पर कब्जा बरकरार रखा वहीं मांट में मथुरा के सांसद जयंत चौधरी ने दिग्गज श्याम सुंदर शर्मा को फिर हरा दिया। लोकसभा में भी शर्मा को उन्होंने ही हराया था। बसपा ने यहां गोवर्धन सीट बचा ली। जबकि छाता और बलदेव में रालोद के उम्मीदवार जीत गए। भाजपा यहां खाता भी नहीं खोल पाई। सोनभद्र में भी सपा की साइकिल ही दौड़ी। हालांकि ओबरा सीट बसपा ने जीत ली। 
वाराणसी के नतीजे भी चौंकाने वाले रहे। जिले की आठ में से तीन सीटें भाजपा ने जीत लीं। उसके श्यामदेव रायचौधरी, ज्योत्सना श्रीवास्तव और रवींद्र जायसवाल जीते हैं। अरविंद कुमार के मुताबिक अपना दल की महासचिव अनुप्रिया पटेल भी चुनाव जीत गई हैं। कांग्रेस और सपा को यहां एक-एक सीट मिली है। जबकि बसपा ने दो सीटें जीती हैं। 
गोण्डा से जानकी शरण द्विवेदी के मुताबिक गोण्डा और बलरामपुर जिलों की 11 में से दस सीटें सपा को मिली हैं। गोण्डा से कांग्रेस सांसद और केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के संसदीय क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवार जमानत भी नहीं बचा पाए। अलबत्ता कटरा बाजार सीट जीत कर भाजपा के बावन सिंह ने पार्टी की लाज बचा ली। कांग्रेस और बसपा का यहां खाता भी नहीं खुल पाया।

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