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Tuesday, January 21, 2014

राजनीतिक पोटाशियम सायोनाइड हमारी जान लेने को तैयार हैं और हम सिर्फ जायका बदल रहे हैं बारिश भी हो रही है और घर भी जल रहे हैं तो जनाब उद्योग लगाता है अमीर और उद्योग का मुनाफा जाता है अमीर की जेब में और उद्योग के लिए ज़मीन की जाती है गरीब की

राजनीतिक पोटाशियम सायोनाइड हमारी जान लेने को तैयार हैं और हम सिर्फ जायका बदल रहे हैं

बारिश भी हो रही है और घर भी जल रहे हैं

तो जनाब उद्योग लगाता है अमीर


और उद्योग का मुनाफा जाता है अमीर की जेब में


और उद्योग के लिए ज़मीन की जाती है गरीब की


पलाश विश्वास


S.r. Darapuri shared Fox News's photo.

Martin Luther Day : Keep Moving !

Today, we honor and remember Dr. Martin Luther King, Jr. ‪#‎MLKDay‬

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Remembering Dr. Martin Luther King Jr today, a great human rights champion. We live by these powerful words in our work every day. How has Dr. King influenced you?

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स‌ंवाद

बारिश भी हो रही है और घर भी जल रहे हैं

तो जनाब उद्योग लगाता है अमीर


और उद्योग का मुनाफा जाता है अमीर की जेब में


और उद्योग के लिए ज़मीन की जाती है गरीब की


हमारे लिए स‌बसे बुरी खबर यह है कि हमारे अग्रज,प्रिय कवि वीरेन डंगवाल जी का स‌ोमवार को होने वाला अत्यंत नाजुक और जरुरी आपरेशन हो नहीं स‌का।परिस्थितियां कहीं ज्यादा ही जटिल हैं।हमारे लिए यह बेहद कठिन स‌मय है। जैसे देश के लिए और बहुसंख्य भारतीयों के लिए भी।हमारे पास हालात बयान करने के लिए शब्द ही नहीं हैं।हम आपको स‌िर्फ बुरी खबरें दे पाते हैं।इसके लिए माफ जरुर करें।


आज केजरीवाल तमाशे का पटाक्षेप तो हुआ लेकिन धर्म युद्ध के लिए कुरुक्षेत्र का अवसान कतई नहीं हुआ।विचारहीन अराजकता का अभूतपूर्व महिमामंडन चल रहा है।इंद्रियां अस्पताल के रास्ते तस्करों के हवाले हैं।हमारे मित्र दुसाध जी ने कवई मछली से केजरीवाल की तुलना कर दी है।


कवई अगर केजरीवाल हैं तो दुसाध जी बाकी मछलियों की प्रजाति भी बता दें।दुसाध जी का फोन आया था आज भी।


हम उनसे बार बार निवेदन कर रहे हैं कि वे अपनी ताकत को पहचानें। उन्हें किसी बैसाखी की जरुरत है नहीं।बहुसंख्य भारतीयों के हित में वे लिखने को सक्षम हैं और उन्हें इसके लिए सचेत रहना होगा कि राजनीतिक कुरुक्षेत्र में वे किसी के साथ खड़े न हों।


अब तक डायवर्सिटी मिशन का कार्यान्वयन चुनाव घोषणापत्रों के जरिये कराने की उनकी रणनीति बहुसंख्य सर्वस्वहाराओं को धर्मोन्मादी खेमों में बांटने का काम करती रही है।


चुनाव घोषणापत्रों से इस देश में कुछ भी बदलने वाला नहीं है।


तमाम राजनीतिक पक्ष जो आर्थिक नीतियां तय करने की कवायद में लगी हैं,उनका मकसद जनता की आस्था नहीं है। भावी प्रधानमंत्री के लिए कारपोरेट तय जो एजंडा है,उसे पूरा करने की कुशलता और प्रबंधकीय क्षमता की अग्निपरीक्षा है,जिसके नतीजे ही जनादेश का स्वरुप बनायेंगे।


दुसाधजी, चुनाव घोषणापत्र और उम्मीदवारे के चयन के लिए संवाद से लेकर राजकाज में जो जनभागेदारी का दिखावा है,उसका प्रतिफलन नीति निर्धारण में नहीं है।चुनाव घोषणापत्रों से अवसरों और संसाधनों का बंटवारा तो होने से रहा।इसके लिए और बड़ी लड़ाई लड़ने की अनिवार्यता है।


सत्यनारायण जी,अभिनव सिन्हा जी की अगुवाई में जाति विमर्श के सिलसिले में पुरानी बहस को फिर दोहराने लगे हैं आह्वान के नये अंक के बहाने। मौजूदा संकट के विश्लेषण में जो सक्रियता वे दिखा रहे हैं,जो जनजागरण अभियान वे चला रहे हैं और मजदूरों के मोर्चे पर उनकी जो लड़ाई जारी है,हम मजबूती से उसका समर्थन करते हैं।


विनम्र निवेदन इतना ही है कि हम अंबेडकर के मूल्यांकन के विरोधी नहीं हैं और न हम मूर्ति पूजक हैं।अभिनव से हमारी लंबी बहस पहले ही हो चुकी है।आनंद तेलतुंबड़े जी भी अपना पक्ष रख चुके हैं।


असहमत होने के बावजूद हम अपने युवा साथियों के तीक्ष्ण विश्लेषण को सलाम करते हैं।पहले भी हमारा निवेदन जो दरअसल था,हम उसीको दोहरा रहे हैं कि यह जरुर तौल लीजिये कि आप संबोधित किन्हें कर रहें हैं और जो आप कहना चाहते हैं,उसे आप संप्रेषित कर पा रहे हैं या नहीं।


हम भी मानते हैं,हमारे मित्र आनंद तेलतुंबड़े जी युवाटीम के निशाने पर जो हैं, वे भी मानते हैं कि चूंकि अंबेडकर विमर्श में प्रस्थानबिंदू जाति उन्मूलन का एजंडा है,उसका क्या हुआ,इसपर गंभीर बहस होनी चाहिए।


हममें से ज्यादातर लोगों को मालूम है कि कम से कम आनंद तेलतुंबड़े अंबेडकर के अंध अनुयायी नहीं हैं।इसके विपरीत बहुजनों में वे ही अंबेडकर के सबसे बड़े आलोचक हैं।लेकिन मराठी और हिंदी के बजाय अंग्रेजी में लिखते रहने के कारण तेलतुंबड़े जी कोई संवाद शुरु करने में नाकाम रहे हैं।


अंबेडकर परिवार से घनिष्ठ संबंध होने के बावजूद,अंबेडकर साहित्यके प्रसार में बड़ी बूमिका के बावजूद,कामयाबी को हर कीमत पर सबसे ज्यादा तरजीह देने की बहुजन मानसिकता के बावजूद अंबेडकर विमर्श के मामले में अंबेडकर अनुयायियों में सबसे अलोकप्रिय कोई हैं तो तेलतुंबड़े ही।क्योंकि वे अबेडकर को प्रासंगिक बनाये रखने के लिए अंबेडकरी आंदोलन और अंबेडकर की भी जरूरी और निर्मम आलोचना से चूकते नहीं हैं।


हम इसे तेलतुंबड़े की असफलता और उनकी रणनीतिक असफलता मानते हैं।इसलिए हम अपनी इस प्रतिबाशाली युवा टीम से जो यकीनन हिंदी भी हमसे बेहतर और निर्भूल लिख पाते हैं,किसी बेहतर तरकीब की अपेक्षा रखते हैं और हम किसी भी मायने में उनके वर्गशत्रुओं में शामिल नहीं हैं।


अपनी प्रतिभा के बावजूद वे दोहराव के शिकार हो रहे हैं,यह हमसे पचाया जा नहीं रहा है।बूढ़े लोग दोहराव के शिकार हैं और उनके मुकाबले बूढ़े तो हम हैं।


जैसा हम आधार प्रकल्प के सबसे बड़े प्रतिरोधी गोपाल कृष्ण जी के बारे में भी मानते हैं कि उनकी सारी लड़ाई असंवेदनशील इलीट को संबोधित हैं।दरअसल हम सारे लोग इलीट को ही संबोधित कर पा रहे हैं।सर्वहारा या सर्वस्वहारा को कतई नहीं।


जो मौजूदा तंत्र को और मजबूत बनाने की लड़ाई लड़ रहे हैं और उन्हीं के ईश्वर हैं अरविंद केजरीवाल जो बायोमेट्रिक डिजीटल रोबोटिक प्रबंधकीय दक्षता व तकनीक कुशलता के कारपोरेट कायाकल्प के साथ दूसरे चरण के सुधारों के प्रधान सिपाह सालार हैं और अब नरेंद्र मोदी या राहुल गांधी के बजाय अव्वल नंबर के कारपोरेट विकल्प हैं,जिनके हक में जनादेश निरमाण की गरज और जुगत में हमें रंग बिरंगी नाना सुनामियों से गुजरना होगा मत गणना तक।


अंध राष्ट्रवाद से कारपोरेट राज को अब बड़ा खतरा है ,इसीलिए मोदी को रोकने के लिए केजरीवाल अव्वल कारपोरेट विकल्प है।अमेरिकी सरकार के ताजा बयानों से यह साफ हो चुका है,जिसे परमाणु संधि का पूरा फायदा उठाना है,भारत में खुदरा कारोबार हासिल करना है और भारत समेत पूरे एशिया का बाजार दखल करना है। जायनवादी त्रिइब्लिस वैश्विक उत्तर आधुनिक रंगभेदी नस्ली मनुस्मृति अर्थव्यवस्था के लिए अंध राष्ट्रवाद अंतिम सीमांत है,जिसे वह कहीं भी अबतक जीत नहीं सकी है।


चूंकि नरेंद्र मोदी अमेरिका का कोई विकल्प नहीं है और कांग्रेस की कोई कूवत नहीं है कि नमोमय भारत निर्माण रोक दें,इसी कारण अमेरिका परस्त मीडिया एनजीओ शक्तिसमूह का साझा उपक्रम है खास आदमी का उत्थान,जो अराजकता को बारकायदा एक नयी विचारधारा बतौर पेश कर रहा है और मध्यवर्ग मद्य वर्ग का जश्नी उपबोक्ता नवधनाढ्य तबका मारे उल्लास बाग बाग है।


यह हिंदू राष्ट्र से भी बड़ा खतरा है जो सीधे सीधे विदेशी औपनिवेशिक बायोमेट्रिक डिजिटल रबोटिक पारमाणविक विध्वंस का स्वर्मिम राजमार्ग बना रहा है जनपथ बजरिये।यह समझना खासकर धर्मनिरपेक्ष मोर्चे के लिए बेहद जरुरी है।धर्मनिरपेक्षता एक चक्षु हिरणी की तरह आचरण करके राष्ट्द्रोही भूमिका का निर्वाह करेगी तो बचाव का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो जायेगा।


मोदी को रोकने पर धर्मनिरपेक्षता की जीत होगी ,ऐसा जो समझते हैं वे उतनी ही गलतफहमी में हैं जितने वे लोग जो मोदी को रोकने के लिए कांग्रेस के महाविध्वंस  कार्यक्रम को विकल्प मान रहे हैंऔर उसी को मजबूत करने में एढ़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं।


हम भारतीयों की तुलना में राजीव गांधी को व्याहकर सोनिया गांधी ज्यादा भारतीय हैं जिन्होंने सबसे पहले मान लिया कि मोदी के मुकाबले में राहुल गांधी कहीं नहीं हैं और पार्टीजनों के भारी दबाव के बावजूद उन्हें प्रधानमंत्रित्व का दावेदार न बनाने की बुद्धिमत्ता दिखायी।


प्रधानमंत्री मनमोहन के बजाय सोनिया गांधी भी बन सकती थीं। उन्होंने ही नहीं बनेने का फैसला किया।वे बनना चाहतीं,तो कोई उन्हें रोक नहीं सकता था।निरपेक्षता का तकाजा है कि हम इस ऐतिहासिक तथ्य को स्वीकार कर लें।हम लोगों से कहीं ज्यादा भारतीय यथार्थ और वैश्विक व्यवस्था की समझ सोनिया गांधी और उनके पुत्र राहुल गांधी को है।


सच बात तो यह है कि पार्टीबद्ध राजनीति की बात भूल जायें तो बाकी प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले राहुल गांधी कहीं ज्यादा ईमानदारी से सामाजिक यथार्थ को संबोधित कर रहे हैं। बाकी लोग विशुद्ध मार्केटिंग कर रहे हैं। लेकिन राहुल गांधी न अपनी पार्टी के भावी प्रधानमंत्री हैं और न कारपोरेट राज के।


यह विश्लेषण आगे आम भारतीयों के लिए कितना बेरहम समय मुंह बांए खड़ा है,उसे समझने के लिए बेहद जरुरी है।1991 से अबतक आर्थिक सुधारों के महाविध्वंस एजंडे को कामयाब बनाने में कांग्रेस की निर्णायक भूमिका रही है और पिछले दो दशकों में भारत और भारतीय नागरिकों के साथ जो गुजरी है,उसके मद्देनजर कांग्रेस को सिरे से खारिज करके उससे भी बेहतर और सुरक्षित कारपोरेट विकल्प जहरीले तेजाबी की खोज के लिए जो जनादेश प्रक्रिया का मल्टी मीडिया चकाचौंधी तमाशाय़ी अराजक रियेलिटी शो बिगबास है,उसके खतरनाक नतीजे के बारे में हमारी दृष्टि साफ हो जानी चाहिए।


करमुक्त भारत का विमर्श,भावी प्रधानमंत्री के एजंडे जैसे पैनल बहसों और सड़क से राजकाज के तमाशे के बाद भी आने वाले समय की मृत्युआहट को सुनने से इस अनंत वधस्थल के हम नागरिक सिरे से इंकार कर रहे हैं,इससे बेदखली का भूगोल अब सिर्फ महानगरों,आदिवासी इलाकों,हिमालय और वंचित समुदायों तक सीमित नहीं रहेगा।


सनद रहे कि अब बेदखली का बुलडोजर किसी को बख्शेगा नहीं।हर गरदन के लिए फांसी का फंदा तैयार है,हर माथे के लिए गिलोटिन श्रृंखलाएं तैयार हैं । करमुक्त भारत दरअसल करमक्त लोककल्याण मुक्त विनियंत्रित नरमेधी विषैला दखलदार विध्वंसक मुक्त अराजक विचारशून्य रोबोटिक मनुष्यविरोधी प्रकृतिविरोधी मुक्त बाजार का जायनवादी विमर्श है।


आर्थिक समितियां जो बन रही हैं,उसकी बनावट किसी परमाणुबम फार्मूले से कम घातक नहीं है,राजनीतिक पोटाशियम सायोनाइड हमारी जान लेने को तैयार हैं और हम सिर्फ जायका बदल रहे हैं।


साहित्य, विधाओं, माध्यमों, कलाओं,लोक, गीतों,मुहावरों,भाषाओं,संस्कृतियों, धर्म,परंपरा,समाज,परिवार और इतिहास के साथ विचारों पर बाजार और मुक्तबाजार के प्रवक्ता अर्थशास्त्रियों की जो पकड़ बनी है,बन रही है,वह कारपोरेटराज से कहीं ज्यादा खतरनाक है।दिल्ली के राजनीतिक दंगल से कहीं ज्यादा खतरनाक है जयपुर का कारपोरेट साहित्यउत्सव।


मित्रों से हम अपनी बात खुलकर कह रहे हैं।उसका ब्यौरा आपको देते रहेंगे।



लेकिन एक अच्छी खबर भी दें।कोलकाता में प्रतिरोध के सिनेमा की धूम मची है।मीडिया कवरेज जनसत्ता के अलावा कहीं नहीं हो रहा है,लेकिन प्रेक्षागृह में अव्यावसायिक प्रतिरोध के सिनेमा के लिए दर्शक खचाखच हैं।


सिनेमा के प्रदर्शन के साथ सिनेमा पर संवाद बी जमकर हो रहा है। पहले दिन मुजफ्परनगर के दंगों से लेकर ओड़ीशा के जनसंघर्ष तक की फिल्में दिखायी गयीं।


लेकिन यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में त्रिगुणासेन आडोटोरियम में मैं पहले दिन जा नहीं सका।आज दूसरे दिन गया तो विस्थापन और प्रतिरोध की थीम पर फिल्मों का का प्रदर्शन हो रहा था।


गाड़ी लोहरदगा मेल चैसी माटी की सुगंध से जुड़ी बेहतरीन फिल्म देखने को मिली।देशभर के शहरी इलाकों और जनपदों,देहात के विकास  कायाकल्प के नाम पर जो निरंकुश बेदखली अभियान है,जादवपुर के पास ही साउथ सिटी माल में उषा मार्टिन कर्मचारियों पर बरपे कहर पर भी एक फिल्म का प्रदर्शन उसी का खुलासा रहा।


लोकगीतों के सीमाओं के आर पार घर बदलने के साथ साथ स्थानांतरण और रुपांतरण पर बेहतरीन मल्टीमीडिया प्रस्तुति भी देखने को मिली।


कल आखिरी दिन परिचर्चाओं के साथ फिल्मों रका प्रदर्शन जारी रहेगा। आनंद पटवर्धन की फिल्म भी कल दिखायी जायेगी। मेरा जाना नहीं हो पायेगा। प्रतिरोध के सिनेमा पर,अलग अलग सिनेमापर और इस आंदोलन पर विस्तार से लिखने की जरुरत है।क्रमशः यह सब होता रहेगा।


हमारे भाई संजय जोशी यह आंदोलन बखूब चला रहे हैं।इसका मुझे गर्व है।


तो एक दूसरे भाई भी हैं हमारे बेहद कामयाब चमकदार, हां मैं इंडिया टुडे के प्रबंध संपादक दिलीप मंडल की ही बात कर रहा हूं,जिन्हें बड़ी तेजी से चंद्रभान प्रसाद बनते हुए देखकर मैं बेहद दुःखी हूं।


बहुजन पेशेवर राजनेताओं की तरह उनका सारा विमर्श आरक्षण केंद्रित हैं।वे हमसे बहुत बेहतर अवस्थान पर हैं। आरक्षण से अब और हासिल नहीं हो सकता।आप अगर सही में मूक भारतीय समाज की समता और सामाजिक न्याय,उनके हक हकूक की लड़ाई में शामिल हैं,तो राथचाइल्ड्स के प्रबंधन में आर्थिक सुधारों के महाविध्वंस को आप स्वर्णकाल मान ही नहीं सकते।


दिलीप भाई,बाकी मुद्दों से मुंह चुराकर अस्मिता पहचान कैद विमर्श से हम इस तिलिस्म को मजबूत ही कर सकते हैं जो बहुसंख्य भारतीयों के वध का कार्यक्रम है।


कारपोरेट चाकर हम सभी लोग हैं।कोई बड़ा तो कोई छोटा।जोखिम उठाने का कलेजा न हो तो कम से कम गलत अभियान छेड़कर पहले से भ्रमित मिथक जाल में उलझी जनता को और दिग्भ्रमित न करें तो बेहतर।


हम दिलीप की क्षमता जानते हैं । बहुत अच्छी तरह जानते हैं।जैसे हम दुसाध की क्षमता और सीमा भी जानते हैं। बहुजनों की कोई आवाज नहीं हैं।आप आवाज बनने की कोशिश कर रहे हैं तो सत्ता वर्ग के महामहिमों से कहीं ज्यादा आपकी जिम्मेदारी है।दिलीप दो टुक शब्दों में ठोस तरीके से बात कह समझा सकते हैं।आरक्षण के अलावा बाकी मुद्दों पर,खासकर आर्थिक जनसंहार पर भी लिखें दिलीप,तो मुझे अपनी बातें कहने समझाने में आसानी होगी।


मित्रों, आप भी सावधान हो जायें।अपने मोर्चे के लोगों को अब सीधे टोकने,रोकने के सिवाय हमारे पास कोई विकल्प नहीं हैं।


हम अस्मिता और पहचान वाले राजनीति और संगठन में नहीं हैं।हमें कोई बाहर का दरवाजा नहीं दिखा सकता।


मेरा कोई दुश्मन भी यह दावा कर नहीं सकता कि हमने अपने कैरीयर और नौकरी को ध्यान में रखकर कभी कोई एक पंक्ति कहीं लिखा है। हम तो नंगे खड़े हैं बाजार में, किसी की चाल में कभी भी आग लगा सकते हैं अगर यह समझ लिया कि उसकी सक्रिय भूमिका के बिना हमारा मोर्चा फेल होने के कगार पर है।


पहले से इसके लिए माफी मांग कर रखता हूं।दिलीप मुझे बहुत प्रिय है,लेकिन मैं उसकी गलतियों को महिमामंडित नहीं कर सकता।


आज औद्योगीकरण पर बांग्ला अखबार में छपे हमारे पक्ष के अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक के साक्षात्कार के मुताबिक जमीन लूटो के देश की अगली सरकार के घोषित एजंडा पर फोकस करने के लिए संवाद शीर्षक चुना था। कुछ काव्य पंक्तियां भी दिमाग में पेंगें मार रही थीं,लेकिन भाई संजय जोशी के सौजन्य से जो पिल्में देख ली,विस्थापन और बेदखली का वह राष्ट्रीय चेहरा देखने के बाद अब कविता की भाषा सिरे से गायब हैं।


अब आगे आपका मंतव्य मिलें तो बहस आगे चलायी जाये।



Rajiv Nayan Bahuguna
बारिश भी हो रही है और घर भी जल रहे हैं
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  • Surendra Grover, Sudha Raje, Mahesh Joshi and 79 others like this.
  • View 6 more comments
  • Harish Rawat एक घंटे से बारिश बंद होने का इन्तजार कर रहा हूँ बस स्टैंड में खड़े हो के इस ठण्ड में बिलकुल नहीं भीगना चाहता बाइक चला के
  • 53 minutes ago · Like · 1
  • Sucheta Sharma मुम्बई में भी हल्की बूंदा बंदी - मौसम खुशगवार - गीला -सीला !!!!
  • 46 minutes ago · Like · 1
  • Dwarika Chamoli लगता है बारिश ने आज सबको अपना लिया है…।
  • तभी तो आज बारिश के चर्चे हो रहे है…
  • बूंद बारिश की ठंडी लगे पर तुझे तो जलते जाना है मुसाफिर
  • 32 minutes ago · Like · 1
  • Pardeep D Raturi दिल भी
  • 14 minutes ago · Like · 1
  • Prince Vishal Singh Rawat ये धुआ धुँआ से रहने दो***
  • 4 minutes ago · Like · 1
  • Palash Biswas यही मेरा देश,यही आपका देश।घर जल रहा है,लेकिन बारिश मूसलाधार।दो टुक ब्यौरा स‌े आपने मेरे पूरे विस्लेषण को चित्रित कर दिया।ाभार नयन दाज्यू।
  • a few seconds ago · Like
  • Palash Biswas आजरोजनामचे ौर स‌ंवाद का शीर्षक भी यही।
  • a few seconds ago · Like
H L Dusadh Dusadh
2 hours ago
केजरीवाल देशी(गांधीवादी) कवई मछली है.
मित्रों !देश के अघोषित सम्राट केजरीवाल ने उस गणतंत्र दिवस,जिसे वह विआईपी लोगों का लाइव इंटरटेमेंट मानता रहा है,पर करुना करते हुए रायसीना हिल्स से कुंच करने का निर्णय लेकर भारतीय लोकतंत्र पर विराट एहसान कर दिया है.चैनलों पर सभी लोग उसका मखौल उड़ा रहे हैं.पर सावधान यह मारवाड़ी देशी कवई मछली है.
मित्रों जैविक विविधता की विराट क्षति के कारण देशी कवई मछली विलुप्ति के कगार पर है.इसलिए इसकी कीमत मिनिमम ५०० रु.केजी.है.कई सालों बाद इसका स्वाद देश के सबसे लिख्खाड़ दलित पलाश विश्वास के घर १३ जनवरी को मिला.उनकी मिसेज और हमारी सविता दीदी सिर्फ एक कवई,जिसका वजन शायद सौ ग्राम होगी, हम दो लोगों के लिए बना कर रखी थी .मित्रों मेरे कहने का मतलब यह है कि जिस कवई मछ्ली से बदमाश पार्टी के बॉस से तुलना किया हूँ,उसकी जीवनी शक्ति अपार है.यह मछली पेड़ो पर चढ़ सकती है.इसे जब फ्राई करने के लिए खौलते तेल में डाला जाता है,तब भी यह छतपटाते रहकर बचे रहने का संकेत देती रहती है.इस मछली को सही में मरा हुआ तब मानते हैं ,जब उसे उदरस्थ कर लिया जाता है.ऐसे में मित्रों आजाद भारत की हिस्ट्री के सबसे घातक तत्व केजरीवाल जिस तरह दिन ब दिन अपने को एक्सपोज करते जा रहा है.इस पर मूलनिवासी बहुजनो में रह-रहकर हर्ष की लहर दौड़ रही है.पर सावधान जब तक इस कवई मछली को इतिहास उदरस्थ नहीं कर लेता तबतक इसे जिन्दा मानकर सावधान रहो .क्योंकि मानवरूपी इस कवई की जीवनीशक्ति कार्पोरेट,शिक्षण,मिडिया,फिल्म-टीवी ,लेखन इत्यादि सभी क्षेत्रों के क्रीम सवर्ण सवर्ण हैं.अतः बिना असावधान हुए आर्यों की वर्तमान पीढ़ी के लेटेस्ट हीरो को जब पूरी तरह इतिहास निगल नहीं जाता,जरा भी आह्लादित न हों.
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Amalendu Upadhyaya posted 2 updates.

Women organizations urge Kejriwal to immediately action against Somnath Bharti

hastakshep.com

New Delhi. Approx. One dozen women organizations have written an open letter to Arvind Kejriwal, the chief minister of Delhi on the role of Delhi law minister Somnath Bharti. These women organizations said, "CCTV footage fro

Narendra Modi

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दुनिया की आधी संपत्ति सिर्फ 85 लोगों के पास, जानिए टॉप 10 रइसों के बारे में

newshunt.com

Source: दैनिक भास्कर- - (21 Jan) दावोस. दुनिया की आधी संपत्ति के मालिक सिर्फ 85 रईस हैं। दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक से पहले वैश्विक विकास संगठन ऑक्सफैम की रिपोर्ट 'वर्किंग फॉर द फ्यू' में यह राज खुला है। रिपोर

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सम्राट पीयूष सुमन
2 hours ago
कजरी का धरना(ड्रामा) खत्म
आखिर क्या मिला इस दो दिन के ड्रामे से।आखिर क्यों गरिबों को झुठे अश्वासन दे कर सांसद के बाहर गैर-कानुनी काम कर रहे हो।गरिबों को काम न दे कर गरिबों को बहकाकर उनके साथ धरना से न तो दिल्ली सुधरेगी और न ही देश। इन सब धरनाओं से लोगों के जन-जीवन पे बहुत असर हुआ और आम आदमी पार्टी को और देश को इस धरने से मिला !!!! बाबा जी का थुल्लु !!!! — with H L Dusadh Dusadh and 16 others.

Himanshu Kumar

आप मानते हैं कि औद्योगिकरण ही विकास है


तो जनाब उद्योग लगाता है अमीर


और उद्योग का मुनाफा जाता है अमीर की जेब में


और उद्योग के लिए ज़मीन की जाती है गरीब की


तो विकास का मतलब हुआ


गरीब से छीन लो अमीर को दे दो


लो जी हो गया देश का विकास


करोड़ों लोगों को बेज़मीन बना कर चंद अमीर घरानों को अमीर बना देने की अर्थनीति को ही आप अपनी राष्ट्रीय विकास नीती कहते हो .


लेकिन संविधान कहता है कि मुल्क के सभी नागरिक बराबर होंगे .


तो सरकारी फौज का इस्तेमाल कर के अमीर के विकास के लिए गरीब की ज़मीन छीनना असंवैधानिक नहीं है क्या ?


कमाल है आप का सारा विकास का ढांचा ही असंवैधानिक है .


देखिये आपकी आँखों का तारा मोदी किस तरह से जनता के सैंकडों करोड़ों रूपये के सामुदायिक संसाधनों को अमीरों के ऊपर लुटा रहा है .

Gujarat: CAG releases report of irregularity in state funds

youtube.com

Trouble brews for Modi's Government. The CAG has released a damning report pointing to several irregularities in ulitization of state funds. The Gujarat gove...

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Satya Narayan

अपने ही बनाये संविधान से अम्बेडकर तो नाराज़ हो गये, पर दलितों को कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं सुझा गये। हाथ में संविधान लिये उनकी मूर्ति आज भी देशव्यापी प्रतिष्ठाप्राप्त है। दलित-मुक्ति की कोई परियोजना समस्त शोषित- उत्पीड़ित मेहनतकशों के मुक्ति-संघर्ष के एक हिस्से के तौर पर ही आगे क़दम बढ़ा सकती है। लेकिन कम्युनिस्ट आन्दोलन की अपनी विचारधारात्मक कमज़ोरियों के अतिरिक्त डॉ. अम्बेडकर का संविधानवादी-क़ानूनवादी नज़रिये का व्यापक प्रभाव भी एक कारण है कि दलित जातियों के मेहनतकश जनसमुदाय ...See More

कैसा है यह लोकतन्त्र और यह संविधान किनकी सेवा करता है? (आठवीं किस्त) - मज़दूर बिगुल

mazdoorbigul.net

अम्बेडकर को लेकर भारत में प्रायः ऐसा ही रुख़ अपनाया जाता रहा है। अम्बेडकर की किसी स्थापना पर सवाल उठाते ही दलितवादी बुद्धिजीवी तर्कपूर्ण बहस के बजाय "सवर्णवादी" का लेबल चस्पाँ कर देते हैं, निहायत अनालोचनात्मक श्रद्धा का रुख़ अपनाते हैं तथा सस्ती फ़तवेबाज़ी के द्वारा मार्क्‍सवादी स्थापनाओं या आलोचनाओ...

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Satya Narayan

कम्युनिस्टों के खिलाफ कुत्साप्रचार कोई नयी बात नहीं है। बुर्जुआ वर्ग लगातार ये करता ही रहता है। पर ये खतरनाक तब हो जाता है जब कभी कम्युनिस्ट रहे (?) लोग ऐसा करने लगते है। समय-समय पर कम्युनिस्ट संगठनों से निकले या निकले गए लोग जब अपनी अभूतपूर्व "एकता " बनाकर ऐसा करने लगे तो सवाल पैदा होना लाज़िमी है। तब क्या ये सवाल पैदा नहीं होना चाहिए कि ये लोग आज व्यक्तिगत स्तर पर क्या कर रहे हैं? इन लोगो कि अपनी पॉलिटिक्स क्या है ? अगर ये लोग फलां संगठन को इतना ही गलत समझते हैं तो उसकी राजनीतिक लाइन पर बहस क्यों नहीं करते या उसके समानांतर कोई नयी ठोस कार्ययोजना क्यों नहीं देते ? जवाब साफ है। राजनीतिक बहस में में उतरने कि सामर्थ्य नहीं है इन लोगो में। वहाँ मुंह कि खाने का डर है। कोई नयी क्रांतिकारी परियोजना खड़ा करने कि कुव्वत है नहीं क्यूंकि वो क्रांतिकारी स्पिरिट कि मांग करती है। इनकी अपनी कोई राजनीति है तो वो बस कुत्साप्रचार कि राजनीति है जिसके जरिये अपनी कुंठित आत्माओं को तर कर सके। क्रांतिकारी कामों में लगे लोगो को देखकर इन रिटायर्ड "क्रांतिकारियों " कि कुंठित "क्रांतिकारी" आत्मा गुहार लगाने लगती है कि उठो ,चलो , कुछ क्रांति का काम करो। और देखते ही देखते तमाम बैठे ठाले ये लोग अपने कुत्साप्रचार का पिटारा खोल के लग पड़ते है। साथ ही साथ कुछ स्वनामधन्य लोग भी इनकी नाव में सवार हो जाते है कि चलो कुछ सनसनीखेज़ हो जाये।

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Satya Narayan

'नरेन्‍द्र मोदी चाय बेचता था, यह रट्टा लगाना वह बंद कर देगा, यदि उसे पता चलेगा कि मुसोलिनी एक लुहार का बेटा था, जो बचपन में लुहारी के काम में अपने पिता की मदद करता था और हिटलर पहले घरों में रंगाई-पुताई का काम करता था। चाय बेचने की पृष्‍ठभूमि वाले नरेन्‍द्र मोदी, यार, तुम्‍हारी तो पृष्‍ठभूमि भी तुम्‍हारे नायकों जैसी ही है!ये तो पोपट हो गया!

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Siriman Sudatt Wankhede

पोचट धर्माची छदमी ढाल: अंधश्रद्धा

श्रद्धा हा धर्माचा पाया आहे. मग असे असतानाही काही लोक अविवेकी वर्तन का करतात? असा प्रश्न विचारला जावू शकतो . येथे मुद्दा अंधश्रद्धेचा नसून धर्माशी निगडीत श्रद्धेचा असतो . 'त्या' धर्माने जशा श्रद्धा विकषित केल्या आहेत त्यानुरूप आचरण करणे अथवा पालन करणे हे पवित्र आणि आवश्यक मानले गेले . त्यामुळेच ती व्यक्ती दगडी मूर्तीत प्रेरणेचे प्रतिक न शोधता त्या मूर्तीत ( गॉड ) शोधतो. हा मुद्दा व्यक्तीच्या आकलनाचा अथवा त्याच्या बौद्धिक कुवतीशी निगडीत नसून धर्म तत्वाच्या पायाभूत अधिष्ठानाशी जुद्लेल आहे. त्यामुळे शिक्षित असो अथवा अल्प शिक्षित , स्त्री असो अथवा पुरुष;त्यांच्या धर्मश्रद्धा नुसार ते लिंग-पिंड प्रतीकाची 'पूजा अर्चना' करतात. आता मुद्दा विवेकवादी बुद्ध धर्मातील काहींचा , जे विकतुबाबाची अथवा अन्य काही देवी - देवतांची पूजा करतात . हा मुद्दा हिंदू व बौद्ध यांच्यातील अचार्नात्मक साम्य दर्शवित असला तरी तात्विक दुष्ट्या , धर्मश्रद्धेच्या दुष्टीकोनातून भिन्न आहे. काही बौद्धजणांनी असे आचरण करणे आणि अन्य धर्मियांनी तत्सम आचरण करणे यात एक मुलभूत व गुणात्मक फरक आहे. विक्तुबाबाच नव्हे तर प्रत्यक्ष बुद्धाच्या मूर्तीची पूजा - अर्चना करणे सुद्धा बुद्ध धर्मच्या मूळ थेरवादी परंपरे नुसार निशीधच आहे. परंतु कालांतराने प्रतिकपुंजा ( मुर्त्यूपच्यात त्या व्यक्ती प्रती आदरभाव करण्यासाठी वंदन करणे ) म्हणून बुद्ध (मूर्ती) पूजा सुरु झाली . परंतु पूजनीय व्यक्ती प्रती आदरभाव व्यक्त करणे केवळ याच अर्थाने ती पूजा ( पुष्पा पूजा इत्यादी ) केली जाते . ती केवळ पूजा आहे मात्र ती 'पूजा -अर्चना' नाही ; हे लक्षात घेतले जावे. पूजा करून अर्चना करणे, आराधना करणे, आपल्या इच्छापूर्तीसाठी देवी- देवताकडे , विनंती करणे , साकडे घालणे म्हणजे झाली पूजा- अर्चना . मात्र अशा प्रकारचा खुद धर्मसंस्थापकाचा आदेश 'अन्य' कोणत्या (श्रमन संस्कृती व्यतिरिक्त ) तरी प्रमुख धर्मात नाही. त्यामुळे काही बौद्धांचे 'तसे आचरण' हे बुद्धधर्मसंगत नाही. हि बाब ती व्यक्ती सुद्धा स्वताही मान्य करते. परंतु हीच गोष्ट इतर धर्माबाबत आणि धर्मियांबद्दल लागू होतच नाही. कारण माझी आराधना करा, मी तुम्हाला स्वर्गात नेयिल वैगेरेचे मुहम्मद आणि येशूचे दावे त्याचप्रकारे शिव - पार्वतीची आळवणी केल्यास लिंग - पिंडाची पूजा केल्यास मन: शांती (?) वैगेरे लाभल्याचे प्रकार हे धर्मसुसंगत अथवा धर्म तत्वसंमत आहेत. म्हणजेच धर्माच्या पायाभूत मुल्य व्यवस्थेवर प्रश्न चिन्ह निर्माण करणे हे तथाकथित विवेकवादी लोकांचे कर्तव्य ठरते; मग तो धर्म कोणताही असो. पण असे सामर्थ्य न बाळगता नुसतेच पुरोगामित्वाचा उसना आव आणत धर्म चिकित्सेला खो देणारी पिढी उत्तरोतर तयार होत राहावी यासाठी , हे सगळे पुरोगामी सोन्गाले ' अंधश्रद्धा' नामक टिनपट वाजवून प्रामुख्याने हिंदू धर्माची ढाल होताहेत . त्याआड मग इस्लाम धर्मीय तसेच ख्रिशन धर्मीय यांचीही सोय होवूनच जाते क्रमश. सदधर्म सभ्यता संघ SSS च मुखपत्र सभ्यधर्म संदेश मासिक जानेवारी २०१४.

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Eng Styanarayan Bhagat

दिल्ली पोलिसांचे नियंत्रण दिल्ली सरकारकडे देण्याची मागणी सातत्याने लावून धरणाऱ्या मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ह्या काँग्रेसवादी,आणि त्याच मागणीसाठी रस्त्यावर उतरण्यास भाग पाडण्यात आलेले मुख्यमंत्री केजरीवाल मात्र अराजकातावादी असे का?अमेरिकेच्या राजधानीत दिल्ली सारखीच पोलिस यंत्रणा कार्यरत आहे असे केंद्र सरकारतर्फे सांगण्यात येत आहे,परंतु दिल्लीची कायदा आणि सुव्यवस्था अमेरिकेच्या राजधानी सारखी का नाही,याचे उत्तर मात्र केंद्र सरकारकडे दिसून येत नाही,दिल्लीच्या पोलिस यंत्रणेत आवश्यक ती सुधारणा घडवून आणण्यासाठी ओबामाच्या परवानगीची गरज नाही,उगीचच ह्या मुद्द्यावरून राजकारणाला वेगळे वळण देण्यात येत आहे,या कॉंग्रेसवाल्यांना मोदीच्या विरोधात केजरीवाल नावाचा दुसरा भिन्द्रनवाला उभा तर करायचा नाही ना अशी शंका येत आहे,,,

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শিল্পায়নের চলতি মডেলে যথেষ্ট কর্মসংস্থান সম্ভব নয়


উন্নয়নের বিকল্প পথ দরকার৷ যে বিকল্পের কথা বামপন্থীরা সে ভাবে ভাবেননি৷ বামপন্থার সঙ্কট প্রসঙ্গে প্রভাত পট্টনায়ক৷ আলাপে বৈজয়ন্ত চক্রবর্তী


বৈজয়ন্ত চক্রবর্তী: অনেকেই বলছেন যে ভারতে বামপন্থা সঙ্কটের মুখে৷ মতাদর্শ হিসেবে এবং একটি রাজনৈতিক গোষ্ঠী হিসেবে৷ আপনিও কি সেটাই মনে করেন?


প্রভাত পট্টনায়ক: স্বীকার করতেই হবে যে সারা পৃথিবী জুড়েই সাবেকি বামপন্থী শক্তি অস্তগামী৷ কাজেই ভারতের পরিস্থিতিকে তার থেকে আলাদা করা যাবে না৷ আদতে সাম্যবাদের শুরুই এক আন্তর্জাতিক মতাদর্শ হিসেবে৷ কিন্ত্ত যে সব কমিউনিস্ট দল এ সময়ে গৌরবোজ্জ্বল ভূমিকা পালন করেছিল, যেমন দ্বিতীয় বিশ্বযুদ্ধের সময় ফরাসি কমিউনিস্ট পার্টি, বা ইতালিয় কমিউনিস্ট পার্টি- তারা আজ প্রায় নিশ্চিহ্ন৷ যখন আমি ছাত্র ছিলাম, তখন ফ্রান্সের কমিউনিস্ট পার্টি মোট ভোটের প্রায় এক-চতুর্থাংশ ভোট পেত৷ এখন সেই দলের অস্তিত্বই প্রশ্নের মুখে৷ কাজেই আন্তর্জাতিক প্রেক্ষিতে সাবেকি বামপন্থার সঙ্কটকে অস্বীকার করার কোনও প্রশ্নই ওঠে না৷ আন্তর্জাতিক স্তরে, বিশেষত বলশেভিক বিপ্লবের অব্যবহিত পরে সারা বিশ্বে যে কমিউনিস্ট আন্দোলন শুরু হয়, তাদের ধারণা ছিল যে সারা পৃথিবীতে সাম্যবাদী বিপ্লব আসন্ন৷ যদি দুই বিশ্বযুদ্ধ বা তার মাঝের বছরগুলির দিকে তাকাই, তখন অনেকেই ভেবেছিলেন, পরিস্থিতি আন্তর্জাতিক বিপ্লবের অনুকূল৷ কিন্ত্ত তা হয়নি৷ তার একটি কারণ উপনিবেশগুলির স্বাধীনতা লাভ, অন্য কারণ কেইনসিয় নীতি অনুসারে অর্থনৈতিক চাহিদার বৃদ্ধি৷ ফলত পুঁজিবাদে স্থিতিশীলতা ফেরে৷ এখন আবার যদিও পুঁজিবাদ সঙ্কটাপন্ন, কিন্ত্ত সারা পৃথিবীতে কমিউনিস্ট আন্দোলন যে ধারণার উপর দাঁড়িয়েছিল, অর্থাত্‍ আন্তর্জাতিক বিপ্লব আসন্ন, সেই ধারণা এখন আর সত্যি নয়৷ কাজেই বামপন্থীদের নিজেদের পুনরাবিষ্কার করতে হবে৷ এবং আমার মনে হয়, সেই পুনরাবিষ্কারের কাজটা হচ্ছে না৷ কিছুটা দক্ষিণ আমেরিকায় হচ্ছে৷ কিন্ত্ত সেটা এখনও প্রাথমিক স্তরে৷ তার ব্যাপ্তিও সীমিত৷ তার উপর আপাতত তারা সামরিক শাসনের উচ্ছেদের পর নিজেদের বিভিন্ন তাত্‍ক্ষণিক সমস্যার সমাধানেই বেশি ব্যস্ত৷ এবং যেহেতু এই সব অর্থনীতির অনেকটাই পেট্রোলিয়াম ও পেট্রো-পণ্যের আয়ের উপর নির্ভরশীল, এই পথ অন্যান্য দেশের পক্ষে অনুসরণ করাও মুশকিল৷




কিন্তু আমরা যদি শুধু ভারতের কথা ভাবি, তবে এই সঙ্কটের পিছনে নিশ্চয়ই বিভিন্ন কারণ আছে৷ তার মধ্যে যদি কোনও একটি মুহূর্তকে চিহ্নিত করতে হয়, তবে আপনি কোনটাকে করবেন?


আমার মনে হয় না ভারতীয় পরিস্থিতিকে আন্তর্জাতিক স্তরে বামপন্থার দুর্বলতার থেকে সম্পূর্ণ আলাদা করে দেখা সম্ভব৷ ভারতে বামপন্থীদের একটা গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা আছে৷ গণতন্ত্র, ধর্মনিরপেক্ষতা এবং প্রগতিশীল অর্থনৈতিক নীতির সপক্ষে তাদের অবস্থান অত্যন্ত জরুরি৷ আমার তো মনে হয় ভারতে একটা ঠিকঠাক বুর্জোয়া সমাজ গঠনের জন্যও বামপন্থীদের দরকার৷ কাজেই ভারতে বামপন্থী কর্মসূচি স্রেফ সমাজতান্ত্রিক বিপ্লবের কর্মপন্থার মধ্যে সীমাবদ্ধ থাকতে পারে না৷ এখন যদি ভারতীয় বামপন্থীদের সঙ্কটের দিকে তাকাই, তা হলে প্রথমে যেটা মনে হয় তা হল, পুরনো কাঠামোগুলো নিয়ে বামপন্থীদের নতুন ভাবে ভাবতে হবে৷ মনে রাখা দরকার, যে ঐতিহাসিক পরিস্থিতির ফলে কমিউনিস্ট আন্দোলন শুরু হয়েছিল, সেই পরিস্থিতি এখন আর নেই৷ কাজেই অভ্যন্তরীণ সংগঠন বা গণতান্ত্রিক কেন্দ্রিকতা ইত্যাদি নিয়ে নতুন ভাবনাচিন্তা দরকার৷ অর্থাত্‍, সমালোচনাকে গ্রহণ করার ক্ষমতা বাড়াতে হবে৷ অন্যান্যদের সঙ্গে মিলেমিশে কাজ করার সামর্থ্য অর্জন করতে হবে৷ ভারতে যুক্তফ্রন্ট গঠনের একটা পুরনো ঐতিহ্য আছে৷ কিন্ত্ত যতটা হওয়া উচিত ছিল, ততটা হয়নি৷ দ্বিতীয়ত, নয়া উদারবাদী অর্থনীতি শহুরে মধ্যবিত্তদের বিপুল ভাবে উপকৃত করেছে৷ সাধারণত এই শ্রেণির মধ্যে থেকেই চিন্তকরা উঠে আসেন৷ (হেসে) যাকে গায়ত্রী অনেক সময় 'থিয়োরি ক্লাস' বলেন৷ এই 'থিয়োরি ক্লাস' বা তাত্ত্বিক শ্রেণি বামপন্থী আন্দোলনের বিকাশের জন্য খুব জরুরি৷ নয়া উদারবাদী জমানায় বামপন্থী আন্দোলন এই চিন্তক শ্রেণির সঙ্গে সম্পর্কচ্যুত হয়েছে৷ সেটা আর একটা গুরুত্বপূর্ণ কারণ৷ কাজেই বামপন্থীদের কাছে দু'টি পথ৷ এক, নয়া উদারবাদের যারা ভুক্তভোগী, যেমন কৃষক শ্রেণি, তাদের মধ্যে আরও শক্তিশালী রাজনৈতিক ভিত্তি গড়ে তোলা৷ অথবা দুই, এক ধরনের নয়া উদারবাদ অনুসরণ করে শহুরে মধ্যবিত্তদের সন্ত্তষ্ট করা৷ এবং বহুলাংশে এই দ্বিতীয় পথটাই নেওয়া হয়েছে৷ যার কোনও সুফল তো ফলেইনি, বরং তা বিপর্যয় ডেকে এনেছে৷ বিশেষত পশ্চিমবঙ্গে৷




পশ্চিমবঙ্গের ক্ষেত্রে অনেকেই বলেন যে ২০০৬ সালে সিঙ্গুরে জমিরক্ষার আন্দোলনই সেই মুহূর্ত৷ আপনারও কি সেটাই মনে হয়?


যদি কোনও একটি বিশেষ ঘটনার নিরিখে ব্যাপারটা ভাবা হয়, তা হলে সে রকমই৷ যখন বামপন্থীরা ১৯৭৭ সালে ক্ষমতায় আসে, তার পরের পনেরো কুড়ি বছর প্রচুর ভালো কাজ হয়েছে৷ পঞ্চায়েত ব্যবস্থা, ভূমির পুনর্বণ্টন, পরিকল্পনা খাতে বরাদ্দের বিপুল বৃদ্ধি এবং অবশ্যই জরুরি অবস্থাকালীন আতঙ্কের পর গণতন্ত্র ও মানবাধিকারের পুনঃপ্রতিষ্ঠা৷ কিন্ত্ত আমার মনে হয় গত শতকের শেষের দিক থেকেই সেই উদ্যম হারিয়ে যেতে থাকে৷ আন্দোলনকে নতুন পথে এগিয়ে নিয়ে যাওয়ার জন্য নতুন ভাবনাচিন্তার অভাব দেখা দেয়৷ কাজেই যে কোনও ভাবে কিছু একটা করে ফেলতে হবে, এই রকম একটা ভাবনা থেকেই পুঁজিপতিদের ডাকাডাকি৷ শিল্প নিশ্চয়ই দরকার৷ কিন্ত্ত শিল্পায়নের এই পথ, অর্থাত্‍, যেনতেনপ্রকারেণ পুঁজিপতিদের রাজ্যে নিয়ে আসতে হবে,- এ ছাড়া অন্য কোনও পথ নিয়ে কোনও চিন্তা করা হয়নি৷ এবং, আমার মনে হয় এই ক্ষেত্রে চিনের সাফল্যের একটা বড়ো ভূমিকা আছে৷ চিনের অর্থনৈতিক কৌশল এতটা সফল না হলে হয়তো ভারতীয় বামপন্থীরা এই পথ বেছে নিতেন না৷ কাজেই এক কথায় বলতে গেলে, যে পথে বামপন্থীরা চলছিলেন, ২০০৬ ঘটনা হিসেবে তারই একটা প্রতিফলন৷ কিন্ত্ত ব্যাপারটা এ রকম নয় যে ২০০৬ সাল থেকে এই পথে চলা শুরু হয়েছিল৷




অতএব আমরা আবার অর্থনীতির সেই ধ্রুপদী প্রশ্নের কাছেই ফিরে এলাম- কৃষিপ্রধান দেশে শিল্পায়ন হবে কী ভাবে? শিল্পের জন্য জমি দরকার, এবং এত জমি পেতে গেলে অধিগ্রহণ করতে হবে৷ সমাধানের পথটা কী?


সমকালীন পরিস্থিতিতে শিল্পায়ন, অর্থাত্‍ পুঁজিবাদী শিল্পায়নের ফলে যথেষ্ট কর্মসংস্থান অসম্ভব৷ কারণ এই প্রক্রিয়ায় যে ধরনের পণ্য উত্‍পাদিত হবে, এবং শহুরে মধ্যবিত্তের যে ধরনের জীবনশৈলীর জন্য এই শিল্পায়ন, তা প্রয়োজন অনুযায়ী চাকরি তৈরি করতে পারবে না৷ আমি আরও এক ধাপ এগিয়ে বলব, উন্নত ধনতান্ত্রিক দেশগুলোর এক সময়ে এই বিপুল পরিমাণ উদ্বৃত্ত শ্রমকে কাজ দিতে পারার মূল কারণ শিল্পায়ন নয়৷ তার কারণ অভিবাসন৷ অর্থাত্‍, ইউরোপ থেকে আমেরিকা, অস্ট্রেলিয়া বা নিউজিল্যান্ডের মতো দেশে বিশাল সংখ্যক মানুষের পাড়ি দেওয়া৷ কাজেই ধনতান্ত্রিক শিল্প চরিত্রগত ভাবেই কর্মসংস্থানের অনুকূল নয়৷ ধনতন্ত্রের ধ্বংসাত্মক ভূমিকা ধনতন্ত্রের সৃজনশীল ভূমিকাকে ছাপিয়ে যেত, যদি না অভিবাসনের মতো 'সেফটি ভালভ' থাকত৷ উন্নত ধনতান্ত্রিক দেশের সেই 'সেফটি ভালভ' ছিল, কিন্ত্ত আমাদের নেই৷ কাজেই শিল্পায়নের সাবেকি কৌশলকে আমাদের পরিস্থিতিতে পুনঃস্থাপন করাটা সম্পূর্ণ অর্থহীন৷ প্রথমত, যে শিল্প তৈরি হবে তার ফলে যথেষ্ট চাকরি তৈরি হবে না৷ দ্বিতীয়ত, কৃষকদের মতো যাঁরা এই প্রক্রিয়ায় উচ্ছিন্ন হবেন, তাঁদের এই প্রক্রিয়ায় অন্তর্ভুক্ত করা যাবে না৷ আর যদি অন্তর্ভুক্ত করতেও পারা যায়, তবে শিল্পায়নের এই প্রক্রিয়া অন্যত্র সাধারণ মানুষকে জীবিকাচ্যুত করবে৷ অর্থাত্‍, কোনও বিশেষ একটি অঞ্চল বা রাজ্য হয়তো উপকৃত হতে পারে, কিন্ত্ত পুরো দেশ নয়৷ কাজেই আমাদের উন্নয়নের বিকল্প কৌশলের কথা ভাবতে হবে৷ তার মানে এই নয় যে, আমরা কৃষিপ্রধান হয়েই থেকে যাব৷ কিন্ত্ত সেই শিল্পায়ন কৃষকদের উচ্ছেদ করে নয়, বরং কৃষক সমবায়ের মতো সংগঠনকে এই প্রক্রিয়ায় অন্তর্ভুক্ত করে করা দরকার৷ কৃষিপ্রধান একটা সমাজে পশ্চিমি শিল্পায়নের মডেলকে জোর করে চাপিয়ে দিলে বিশেষ কাজ হবে না৷


কিন্তু ধনতন্ত্রের চেহারাও তো পাল্টেছে৷ এখন আর্থিক পুঁজিভিত্তিক ধনতন্ত্রে হয়তো পুরো কাণ্ডটা হচ্ছে কয়েকটা কম্পিউটার টার্মিনালে৷ আপনি যাকে ধনতন্ত্রের 'স্বতঃস্ফূর্ততা' বলেন, তার মোকাবিলা কী ভাবে করবেন?


ঠিকই৷ প্রোলেতারিয়েত অর্থাত্‍ সর্বহারা-র যে চেহারা ছিল এক সময়ে, তা সম্পূর্ণত বদলে গিয়েছে৷ এমনকী যাঁরা কলকারখানায় কাজ করছেন, তাঁদেরও একটা বড়ো অংশ অস্থায়ী ঠিকা শ্রমিক৷ সর্বোপরি, সংগঠিত শিল্পক্ষেত্রে শ্রমিকদের সংখ্যা ও অর্থনীতিতে মোট কর্মীসংখ্যার অনুপাত ক্রমেই কমছে৷ কাজেই যাঁরা স্থায়ী কাজে নিযুক্ত নন, সেই শ্রমিকদের কী ভাবে সংগঠিত করা যায় সেটা নিয়ে ভাবতে হবে৷ কিন্ত্ত তার সঙ্গে আর একটা সমস্যাও সমান গুরুত্বপূর্ণ৷ আমার মতে, এখনকার আর্থিক পুঁজিভিত্তিক ধনতন্ত্রের জন্য সব থেকে ক্ষতিগ্রস্ত হচ্ছেন ক্ষুদ্র উত্‍পাদক, ভূমিহীন এবং ক্ষুদ্র কৃষক, গ্রামীণ কারিগর ইত্যাদি মানুষ৷ কাজেই তাঁদেরও সংগঠিত করতে হবে৷ মনে রাখা দরকার, ধনতন্ত্রের এই সঙ্কট স্বল্পমেয়াদি নয়৷ যদি কিছু কালের জন্য মন্দা কাটেও, একই সমস্যা আবার দেখা দেবে৷ এই প্রেক্ষিতে সাধারণ মানুষকে আকৃষ্ট করতে বামপন্থীদের একটা বিশ্বাসযোগ্য বিকল্প কর্মসূচি পেশ করতে হবে৷ নইলে 'টি পার্টি' ইত্যাদির মতো ডানপন্থী শক্তির পুনরুত্থান প্রতিরোধ করা কঠিন৷

Aam Aadmi Party

Has a cop ever asked you or anyone you know for a bribe. If yes click 'Like' and share the story in comments.

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क्या कभी किसी पुलिसवाले ने आपसे या आपके किसी जानने वाले से रिश्वत मांगी है? यदि हाँ तो पोस्ट 'लाइक' करें और कमेंट्स में अपनी कहानी बताएं.

Like ·  · Share · 20,6473,730813 · 11 hours ago ·

Feroze Mithiborwala

Kumar biswas does it sgain by insulting Malayalee nurses with his sexist and casteist remarks. He is clearly rightwing and this has been proved once again.

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Reyazul Haque

Unbeatable dissenters!

Banojyotsna Lahiri

toh suna agli baar..bajrang dal ke sath..topi pahenke..bharat mata ki jai nara lagate hue..aap bhi dikhoge, "comrade"!! Wah re siyasat (sansad-wali)

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Dilip C Mandal

दिल्ली पुलिस संसद के प्रति और देश की जनता द्वारा निर्वाचिंत सांसदों के प्रति जवाबदेह है. दिल्ली पुलिस का बजट संसद में पास होता है. ऐसी व्यवस्था दुनिया के कई देशों में है. वाशिंगटन की पुलिस अमेरिकी संसद के अधीन है.


भारतीय संविधान ने संघीय ढांचे की व्यवस्था दी है जिसमें संसद की सर्वोच्चता स्थापित की गई है. दिल्ली या किसी भी एक राज्य की सरकार को देश की राजधानी की पुलिस का नियंत्रण नहीं सौपा जा सकता.


अरविंद केजरीवाल के शिक्षकों को शर्म आनी चाहिए कि उन्होंने स्कूल में उन्हें ठीक से संविधान नहीं पढ़ाया है.

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  • Rahul Vimal, Pankaj Chaturvedi, Sheeba Aslam Fehmi and 211 others like this.

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  • वेद केजरीवाल के गुरु को अभी बाबा साहेब का शिष्य बनने की अवश्यकता है..

  • 12 hours ago · Like

  • Sarvesh Verma वैसे इस पोस्ट में मंडल साहब पता नहीं क्या कहना चाह रहे है ।कहने को तो ये भी कहा जा सकता है की संविधान ने कानून व्यवस्था को राज्यों के जिम्मे सौंपा है और केजरीवाल अगर उसी स्टेटस की मांग कर रहे है तो क्या गलत है।

  • 11 hours ago · Like · 2

  • Akash Patel प्रश्न तो वाजिब ही है। अगर कानून व्यवस्था राज्य का विषय है तो क्यों न राज्यों को दी जाय।

  • 10 hours ago · Like · 1

  • Asad Khan बार बार संविधान की दुहाई देने वाले लोग जो सिस्टम के टूटने क डर दिखा रहे हैं वाशिंगटन डी सि क उदहारण दे रहे हैं। तो उनकी जानकारी के लिए वहां क पुलिस विभाग जनता के चुने हुए प्रतिनिधि मेयर को रिपोर्ट करता है।http://mayor.dc.gov/page/safe-communities

  • Safe Communities | mayor

  • mayor.dc.gov

  • One of the District government's most important responsibilities is to ensure th...See More

  • 2 hours ago · Like

Feroze Mithiborwala

The AAP protest is basically demanding the transfer and susprnsion of the cops where the Danish rape, burning of a girl and the drug prostitution rackets are known to be carried out under police protection. Do note that when a window of Shinde jis house, our central Home Minister, was broken, 12 cops were suspended. But here after numerous ongoing crimes against ordinary citizens, Shinde ji refuses to transfer the accussed cops. Thus the protests.

Like ·  · Share · 46 minutes ago ·

Lenin Raghuvanshi shared Bob Marley's photo.

Need of time in India in general and for so-called revolutionaries of Urban areas:

http://www.pvchr.net/2011/07/call-for-neo-dalit-movement-to.html

http://www.pvchr.net/2012/03/women-folk-school-on-neo-dalit.html


Please read follows and listen a song also:

http://www.pvchr.net/2011/08/war-in-africa-is-not-so-different-that.html

"That until the basic human rights are equally guaranteed to all, without regard to race -Dis a ‪#‎WAR‬."

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Amalendu Upadhyaya

क्या केजरीवाल जी, अब पुलिस और सीबीआई की स्वायत्तता नहीं चाहिए ?

Like ·  · Share · 16 minutes ago ·

Seema Mustafa

Have thought n thought about AAP on dharna, must confess vacillated between the " anarchic" and "aam aspirations" positions and guess what? Have settled on the latter. Powerful Sheila Dixit could

Not get the police under her control despite her own party being at power in the centre so clearly there was no question of the congress listening to Kejriwal. If we accept that Delhi police should be under Delhi govt then we have to accept the dharna as that alone will ramp up the pressure on the UPA ; and two keep the poor mans adrenalin flowing. One can see the last from the support Aap is getting from those without drawing rooms.

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  • 42 people like this.

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  • View 17 more comments

  • Yousuf Naik strange to see the Grandure of police .What should a common man expect from such Security and Ministry

  • 57 minutes ago · Like

  • K Ashok Rao Sorry Seema, the means must justify the ends. How did backing a dispeakable character like Bharati and suspension of Police whi defied the VIP (in the non VIP culture) against illegal action suddenly become a virtuous demand for control of police and protection of women. If an inquiry requires police officials to be suspended, then by the same logic even the VIP minister must resign.

  • 36 minutes ago · Like

  • Ziya H. Rizvi One may agree or not with Kejriwal theatrics but certainly his dharna has brought the insensitive Delhi police under siege. For decades.police in India has behaved the way it did during colonial rule.It needed a Kejriwal

  • 35 minutes ago · Like · 1

  • Rajender Kaul Seema Mustafa In developed countries , as in UK, the Police commissioners are appointed by local councils.This makes the Police accountable to the common man!!!

  • 23 minutes ago · Like

Manish Kumar Neurosurgeon shared Aam Aadmi Party's photo.

Salman Khurshid sahab is lying . . . But then why cant he file a case on Kejariwal for will full spread of misinformation . . . if Mr. Khursheed has guts . . . https://www.facebook.com/photo.php?fbid=459818110784621&set=a.300369023396198.53817.290805814352519&type=1&theater

Foreign affairs minister Salman Khurshid has come on record saying that no letter came from Ugandan Embassy and furthermore denies the existence of a Ugandan Em...See More

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  • Prabhat Kumar Khurshid is lying, entire Congress is lying...but what AAP is doing...are they NOT lying? Do you want to wash mud with mud?

  • 35 minutes ago · Like · 1

  • Murli Dhar केजरीवाल जी; आम जनता को हराने पर तुले हुए हैं। ये भी जयप्रकाश नारायण जी के आंदोलन के नाजायज पैदाइश जैसे ही हो जाएंगे। जनता का क्या है धोखा खाती रही है और आगे भी खाती रहेगी।

  • और तब तक खाएगी जब तक इंसान में भगवान ढूँढना नहीं बंद करेगी ।

  • और तब तक खाएगी जब तक अपना काम दूसरे के भरोसे छोरेगी।

  • 34 minutes ago · Like · 1

Satya Narayan

काम के घण्टे को सीमित रखने और इसके लिए कानूनी सीमा तय करने की लड़ाई वास्तव में पूँजीपति के मुनाफा बढ़ाने के प्रयासों पर एक चोट होती है। मन्दी के दौर में पूँजीपति वर्ग के विरुध्द आठ घण्टे के कार्य-दिवस की लड़ाई वास्तव में पूरी पूँजीवादी व्यवस्था के लिए एक संकट पैदा करती है क्योंकि यह पूँजीपति वर्ग के लिए मुनाफे को बढ़ाने के प्रयासों को मुश्किल बनाती जाती है। वास्तव में, आज की वैश्विक मन्दी के दौर में, बल्कि 1970 के दशक से सतत जारी संकट के दौर में दुनियाभर का पूँजीपति वर्ग मज़दूरों के कार्य-दिवस के अधिकार को छीनने की कोशिश कर रहा है और ख़ासतौर पर 'तीसरी दुनिया' के देशों में वह काफी हद तक कामयाब भी हुआ है। आज एशिया, अफ्रीका और लातिन अमेरिका के देशों में बिरले ही ऐसे कारख़ाने मिलते हैं जिनमें 8 घण्टे के कार्य-दिवस के कानून का पालन होता है। काग़ज़ी तौर पर तो आठ घण्टे के कार्य-दिवस का कानून मौजूद है लेकिन इसका कहीं भी पालन नहीं होता। इन्हीं कारणों से मज़दूर वर्ग के लिए पूँजीवादी व्यवस्था के रहते कार्य-दिवस की लम्बाई का प्रश्न हमेशा महत्‍वपूर्ण बना रहेगा।

http://www.mazdoorbigul.net/Charter-of-demand-education-series-2

माँगपत्रक शिक्षणमाला – 2 कार्य-दिवस का प्रश्न मज़दूर वर्ग के लिए एक महत्‍वपूर्ण राजनीतिक प्�

mazdoorbigul.net

मज़दूर वर्ग का एक बड़ा हिस्सा अपनी राजनीतिक चेतना की कमी के चलते इस माँग को ज़रूरत से ज्यादा माँगना समझ सकता है। लेकिन हमें यह बात समझनी होगी कि मानव चेतना और सभ्यता के आगे जाने के साथ हर मनुष्य को यह अधिकार मिलना चाहिए कि वह भी भौतिक उत्पादन के अतिरिक्त सांस्कृतिक, बौध्दिक उत्पादन और राजनीति में भाग ल...

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Aam Aadmi Party

Rain and Thunderstorm in Delhi but protests continue at Rail Bhawan. People have joined in huge numbers but were stopped due to the barricades.


"I appeal to all the people from Delhi to take a day off from work and join the dharna, sit on dhrana wherever you are stopped," Arvind Kejriwal.

Like ·  · Share · 3,450574378 · about an hour ago ·

Amalendu Upadhyaya

क्या तीन महीने पानी बिल माफ की तरह तीन महीने के लिए केजरीवाल को पुलिस नहीं दी जा सकती, या केजरीवाल को दिल्ली पुलिस का कमिश्नर नहीं बनाया जा सकता ? अमां भाई कुछ करो इस तीसमारखां का यह दांव भी देख लो, वैसे दिल्ली में भ्रष्टाचार खत्म हो गया है, रामराज्य है....

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  • Pankaj Chaturvedi and 16 others like this.

  • Devendra Yadav अगर दिल्ली को पूर्ण राज्य के दर्जे के रूप में इन्हें सोने के थाल में दे दिया जाए तब भी ऐसी अराजक कार्यशैली से पुलिसिंग सिस्टम दुरुस्त हो जाने की उम्मीद नही पाली जा सकती।

  • 14 hours ago · Like · 1

  • Shiv Das नौकरशाही को बदलना इतना आसान नहीं। वैसे भी खुफिया विभाग अपने हिसाब से ही नौकरशाही और सत्ता को चलाता है

  • 14 hours ago · Like

  • Sandeep Verma केंद्र सरकार फास गयी है ,इसको चलाने वाले बाबू अब कांग्रेस की लुटिया डूबा के ही रखेंगे,

  • 13 hours ago · Like


Jayantibhai Manani

भारत में जाति और वर्ण एक क्रूर सच्चाई है. जाति की बात करना अच्छा नहीं लगता लेकिन वर्ण व्यवस्था में जन्मजात उच्च बताई और बनाई गई जातिओ का ही भाजपा और कोंग्रेस के शासन में एकाधिकार चलता आया है और आज भी चलता रहा है. देश के 54% ओबीसी समुदाय की 1947 से 2014 तक कि जा रही उपेक्षा ने देश में लोकतंत्र को पनपने नहीं दिया है. देश में तमिलनाडु ही एक मात्र ऐसा राज्य है, जहा लोकतंत्र पनपा और फलाफूला है और ओबीसी समुदाय की उपेक्षा नहीं हो रही है.

मित्रो, आप क्या कहेंग?

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  • Ashok Dusadh, Sunil Sardar, प्रचंड नाग and 43 others like this.

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  • Jayantibhai Manani -

  • भाई Chhattisgarh Pradesh Sahu Samaj, आप तमिलनाडू के ओबीसी आन्दोलन का अभ्यास करे तो पता चलेगा कि तमिलनाडु में ओबीसी, एससी और एसटी समुदाय की उपेक्षा नहीं होती है. क्योकि वहा शासन मनुस्मृति की मानसिकता से नहीं लेकिन देश के संविधान की मानसिकता से चल रहा है. तमिलनाडु ही देश का ऐसा राज्य है, जहा ओबीसी के वसति अनुसार सांसद, MLA चुनकर आते है और प्रशासन में भी ओबीसी का वसति अनुसार प्रतिनिधित्व है.

  • about an hour ago · Like

  • Chhattisgarh Pradesh Sahu Samaj आपका कहना सही है पर तमिलनाडु में लम्बे समय तक सामाजिक आन्दोलन चला था जिसके कारण विभिन्न जातियां एक-दुसरे के नजदीक आये थे ,वैसा आन्दोलन दुसरे राज्यों में नहीं चला है |

  • about an hour ago · Like · 1

  • DrBansh Bahadur ऐसा आन्दोलन चलना चाहिए

  • 52 minutes ago · Like

  • Aarvind Maru साचु छे श्री bhalia के साथ में समत हु, परप्रकाश हमेशा निराशा देती हे हमे सयम प्रकाशीत होना होगा

  • 19 minutes ago · Edited · Like


Rajiv Lochan Sah

हमारे यहाँ तो भाजपा-कांग्रेस के छुटभैये नेता ही पुलिस के एसओ को लाइनहाज़िर करवा देते हैं अगर उनकी गाड़ी का चालान करने का दुस्साहस किया तो. अभी 31 दिसम्बर की रात नैनीताल के एसडीम का सेकंडों में ट्रान्सफर हो गया. उसने 12 बजे रात के बाद भी एक फाइव स्टार होटल में बज रहे डीजे को बन्द करवाने की हिमाकत की थी. अफ़वाह है कि यह प्रदेश के युवराज का करिश्मा था. ...ऐसे में वह मुख्यमंत्री ही क्या जो अपनी सांवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल कर चार पुलिस वालों को भी ससपेंड न करवा सके. मगर केजरीवाल का यह करतब नया और अनूठा लगते हुए भी पच जैसा नहीं रहा है. मानसिकता ही ऐसी बन गई है. वैसे तो डॉक्टर लोहिया कहा करते थे,"जिंदा कौमें पाँच साल इन्तजार नहीं करतीं." लेकिन जनता के कष्ट तो बेशुमार बढ़े ही हैं इस धरने से....


अराजकता तो यह है ही. तीसरे दौर की अराजकता. एक नेहरू-इंदिरा युगीन अराजकता थी...शालीन....जब शेरवानी पर गुलाब का फूल लगा कर मधुर स्मित के साथ एक प्रदेश की निर्वाचित सरकार को बर्खास्त किया जा सकता था या सुन्दर साड़ी पहन कर देश पर इमरजेंसी थोपी जा सकती थी. फिर मंडल-कमंडल के दौर की उद्दण्ड अराजकता आई, जब रथ दौड़ने लगे, लाशें बिछने लगीं, हर बंद-चक्का जाम में सैकड़ों गाड़ियाँ फूँकी जाने लगीं...सरकारी संपत्ति नष्ट की जाने लगी. अब यह साइबरयुगीन, मैनेजमेंटप्रधान, मीडियाआधारित ज़माने की अराजकता है, जो न जाने कहाँ ले जाती है!


इतिहास के प्रवाह में बहते चलिए...

Unlike ·  · Share · 43 minutes ago ·

जिनसे अमेरिका को कोई खतरा नहीं है, अमेरिकी उनकी जासूसी नहीं करता!

hastakshep.com

आदमजाद नंगा होकर अब मुक्त बाजार के महोत्सव में हम जश्न ही मना सकते हैं, अपनी जान माल की हिफाजत नहीं। पलाश विश्वास खास खबर है, जिनसे अमेरिका को कोई खतरा नहीं है,अमेरिकी उनकी जासूसी नहीं करता। खतरा जिनसे हैं मसलन अमेरिका के मित्र देशों के राष्ट्रध्यक्ष, प्रधानमंत्री से लेकर अमेरिकी नागरिक तक की प्रिज्...

Like ·  · Share · 3 minutes ago ·

Srijan Shilpi

केजरीवाल के मौजूदा धरने में कोई आम आदमी शामिल नहीं है। केवल आम आदमी पार्टी के वे कार्यकर्ता शामिल हैं जो इस स्वार्थ के साथ उनके साथ जमघट लगाए हुए हैं कि उनकी राजनीति में जुड़कर वे भी आज नहीं तो कल खास बन जाएंगे।


मीडिया और सोशल मीडिया के मंचों पर उनके इस अराजक धरने का समर्थन केवल वे अति वामपंथी मित्र कर रहे हैं जो मूलत: नक्सली, माओवादी एवं मुस्लिम आतंकवादी हिंसक संगठनों के ह्वाइट कॉलर समर्थक रहे हैं, जो दशकों से एक राष्ट्र के रूप में भारत का बंटाधार करने का नापाक मंसूबा पालते रहे हैं, पर जो इतने अवसरवादी भी रहे हैं कि अपने सुख-मौज को तिलांजलि देकर खुद सड़कों पर पुलिस और मौसम की मार खाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते!


वे अगड़ी जातियों के बुद्धि-विलासी अवसरवादी लोग कांग्रेस की सरकारों से मलाई खाने के बाद अब केजरीवाल के कंधों पर चढ़कर अपने स्वार्थ की फसल काटने के लिए उनके अंध समर्थक बनने का बढ़-चढ़कर दिखावा कर रहे हैं।


असल में, वे अपने स्वार्थ के लिए केजरीवाल को उकसा रहे हैं.....चढ़ जा बेटे सूली पर, भली करेंगे बाबा मार्क्स!

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Abhishek Srivastava

फि़लवक्‍त दो अंतर्विरोध तीखे हो रहे हैं। एक- आम आदमी पार्टी का आंतरिक अंतर्विरोध, जिसे हम उसकी ''घोषित विचारधारा निरपेक्षता'' और ''व्‍यवहार को संचालित कर रहे विचार'' की रगड़ के रूप में समझ सकते हैं। दूसरा- ''राज्‍य मशीनरी'' और ''जनता की चुनी हुई सरकार'' के बीच का अंतर्विरोध।


पहला अंतर्विरोध लंबी दौड़ में फासिस्‍ट राजकाज के बीज संजोए हुए है। दूसरा अंतर्विरोध लंबी दौड़ में पूंजीवादी लोकतंत्र के राजकाज को स्‍मूथ बनाकर फासीवादी खतरे को विलंबित करने की क्षमता रखता है। पहले अंतर्विरोध का चूंकि आम आदमी पार्टी नाम की परिघटना के अपने वजूद से ज्‍यादा ताल्‍लुक है, लिहाजा दूसरे वाले व्‍यापक अंतर्विरोध पर हमें ज्‍यादा ध्‍यान देना चाहिए।


यही कारण है कि जो लोग कह रहे हैं कि इस बार धरना देकर अरविंद ने गलती की है और इससे भाजपा/मोदी की राह आसान हो जाएगी, मैं उनसे सहमत नहीं हो पा रहा। आप देखिए कि पहली बार पूरा का पूरा तंत्र संवैधानिकता की आड़ में आज आआपा के खिलाफ खड़ा हो रहा है, वे संस्‍थाएं भी जो कल तक इस आंदोलन को हवा दे रही थीं। यह अपने आप में इस बात का संकेत है कि इस बार का धरना पहले वाले तमाशों से ज्‍यादा वास्‍तविक पोटेंशियल रखता है।


खूंटा पकड़ कर मत रहिए, बदलते डिसकोर्स को समझिए...!

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  • Avinash Das, Shree Prakash, Arun Kumar Arun and 8 others like this.

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  • Abhishek Srivastava Arvind Shesh अश्‍वेत महिलाओं को ज़लील करने की बात अपनी जगह है। जो हुआ, निंदनीय और गलत था। मैं जिस लोकेशन से यह बात कह रहा हूं वह दरअसल उस अंतर्विरोध को देखने से आ रही है जिसके तीखे होने से हमारी-आपकी राजनीति को लाभ ही होगा, नुकसान नहीं। यह धरना हो या त...See More

  • about an hour ago · Edited · Like · 2

  • Vishnu Sharma मैं आरिया हूँ कि जारिया हूँ

  • रिवर्स में मुस्कुरारिया हूँ।

  • about an hour ago · Like · 1

  • Arvind Shesh अगर आपको इनकी चिंता फर्जी नहीं, वास्तविक लगती है, तो आप ऐसा मान सकते हैं। और अगर आपको उन "काली" महिलाओं को सार्वजनिक रूप से पेशाब करवाने, उनके साथ मारपीट करने, उनहें "ब्लैक" कह कर जलील करने का विरोध कांग्रेस-भाजपा की भाषा लगती है, तो मुझे कुछ नहीं कहना।

  • about an hour ago · Like · 1

  • Arvind Shesh और केजरीवाल के "अपने" मंत्री और "अपनी" भीड़ के उन महिलाओं के साथ फासीवादी बर्ताव से उपजी मुश्किल से निपटने के लिए आयोजित तमाशा आपको फासीवाद को खत्म करने की कवायद लगती है, फासीवाद को लेकर एक भ्रम पैदा करने की कोशिश नहीं, तो आप शायद सही होंगे...!

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Vidya Bhushan Rawat

Kejriwal is trapped in his own contradiction. He is enjoying state patronage. He remains an unaccountable chief minister. Speaking the vulgar language against other political leaders as if this man is the only one in India with 'noble' ideas. There is a crowd of those who have enjoyed patronage by corporate and power now to make him 'Gandhi'. Ofcourse, it is Bania age as they seems to have taken over from the Brahmins but Kejriwal knows what he is doing ? Kejriwal is an expert in dramatics and these nautankis give enough fodder for 24 hours TV channel. They are being played for 2014. I want to ask what is wrong if an official does not agree for a Minister who is wrong after all Kejriwal has himself said many times that our police has political interference. What was Lok Pal. It was simply control of a bureaucrat who would dominate over elected representative. Today, Kejriwal says that chief minister should have power to dismiss a policemen but he does not want PM to have power to control CBI. It means he now agree that bureaucrats, police and military etc need to be under political control but then in Kejri scheme of things except him none other know things, none other is cleaner than him. It is too simple to suggest that all the issues of women are related to law and order. Kejriwal is a liar in this regard. He has no word to tell ( a majority of his own supporters) to behave properly with women. If he could suggest that this violence against women is not just political in nature but the very culture that Kejri and his supporters are so proud off. There are many issues which are socio cultural and need to be challenged. It is easy to challenge the political system but not the feudal brahmanical cultural value system which Kejri has never ever spoken of. It is time for him to speak on various issues concerning our society. He can not be simply bijli paani chief minister of Delhi. He has to show that he can govern. He can not intrude in our personal lives. He need to wake up that he is chief minister of Delhi.

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Feroze Mithiborwala

Now we are told that the Indian Mujahedeen has plans to kidnap Delhi CM Arvind Kejriwal, so that they can free Yasin Bhatkal. What a darn yarn. The Delhi Special Branch informed Kejriwal asking him ti take security cover, which he again refused. This even as Kejriwal-AAP continue to protest againgst police corruption and for the handing over control of the police to the Delhi state. And for those that yet doubt the reality of the IM, the IM is nothing but a covert creation-operation of the Intelligence, the IB - Intelligence Bureau! Koi shak? Any doubt?

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Rajiv Nayan Bahuguna

बारिश भी हो रही है और घर भी जल रहे हैं

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Dilip C Mandal

दिल्ली पुलिस को दिल्ली सरकार के तहत लाने के लिए संघर्ष करेंगे का चुनावी घोषणापत्र का वादा तो केजरीवाल ने पूरा कर दिया, व्यापारियों से वैट सरलीकरण का वादा भी निभा दिया. जिनके घर पानी और बिजली का मीटर है उस मिडिल क्लास को सस्ती बिजली और पानी का वादा भी निभा दिया....


सफाई कर्मचारी अभी पर्मानेंट होने के लिए कतार में हैं.

बाकी ठेका कर्मचारी भी कतार में हैं.

रिजर्वेशन का बैकलॉग पूरा करने का वादा भी कतार में है.

रिजर्वेशन ढंग से लागू करने का वादा भी कतार में है.

महिलाओं की सुरक्षा के लिए कमांडो फोर्स का वादा कतार में है.

मुस्लिमों से किए गए वादे कतार में हैं.


आप की सरकार में आप कतार में हैं.

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जनज्वार डॉटकॉम

अच्छा हुआ धारणा इस तरह नहीं बनी कि बिल्ली ने रास्ता काटा और एक-एक करके सब रुकते गए. जब तक पंडित हवन-पूजन करने न पहुंचे, तब तक रास्ता बंद! ऐसा हो गया होता तो कोई न कोई पंडित रास्ते पर इसके निवारण के लिए बैठा होता. रास्ते भी बहुत हैं और बिल्लियां भी, पंडितों की दुकान अच्छी ख़ासी चल पड़ती...http://www.janjwar.com/society/1-society/4717-andhvishvas-kee-samajik-jakdan-by-lalit-fulara-for-janjwar

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Virendra Yadav

2014 के लोकसभा चुनाव का प्रचार 'आप' पार्टी ने रेल भवन के सामने अपने धरने से शुरू कर दिया है .जो मीडिया मोदी और राहुल के भाषणों को लाईव दिखा रहा था वह अब केजरीवाल पर केद्रित है .केजरीवाल ने आज धमकी भी दे दी कि 2014 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस धूल चाटेगी ..अब केजरीवाल की रणनीति किसी न किसी तरकीब से अपनी सरकार बर्खास्त करवाने की है .उन्होंने पुलिस से वर्दी उतारकर आन्दोलन में शामिल होने की अपील कर ही दी है और यह मान लिया है कि वे अनार्किस्ट हैं .. यह क्षण कांग्रेस और केंद्र सरकार के धैर्य की प्रतीक्षा का है .कांग्रेस की स्थिति ' भई गति सांप छछूंदर केरी ' सरीखी है . "आप " के रणनीतिकारों की फिलहाल बांछे खिली हुयी हैं उन्हें लोकसभा में हर पल अपनी सीटें बढ़ती दिखाई दे रही हैं . कार्पोरेट मीडिया पशोपेश में है कि वह किस घोड़े पर अंतिम दांव लगाये -मोदी ,राहुल या केजरीवाल पर !

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  • Ashutosh Kumar, Sheeba Aslam Fehmi, Sunil Sardar and 89 others like this.

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  • Ajit Priyadarshi bahut sahi soch-vichar

  • 3 hours ago · Like · 1

  • Shravan Tyagi sb media ke liye ha. .2014

  • 2 hours ago · Like

  • Rajendra Singh ये अराजकता अच्छी हे खुशबु की तरह अरविन्द ने आम जनता को जगा दिया हे हर जगह लोग सडको पर आ रहे हे पुलिस हो या पानी का मुद्दा हो या और कोई पिछले शनिवार को हमारे शहर में 20हजार जनता पुलिस के खिलाफ सडको पर थी कोई पार्टी आज तक न कर पाई वो आम आदमी ने किया लोग आगे होकर आप को ज्वाइन कर रहे हे हर जाती हेर मजहब का इन्सान आ रहा हे ।ये तूफान के आने के संकेत हे ।

  • 54 minutes ago · Like

  • Pradeep Tewari वे अब यह साबित करना चाहते है कि वे आवारगी का शिकार है और सरकार चलाना उनके वस् में नहीं है.

  • 40 minutes ago · Like


Ranjit Ludhianwi

about an hour ago ·

  • सर्वेःअभी चुनाव हों तो क्या होंगे बंगाल, बिहार, ओडीशा के नतीजे
  • आईबीएन-7 | नई दिल्ली।
  • लोकसभा चुनाव में अब 100 दिन से भी कम वक्त बचा है। सियासी मोर्चे पर सेनाएं कमर कस चुकी हैं। सेनापति विरोधियों को ललकारने में जुट गए हैं, ऐसे में ये जानना दिलचस्प है कि आखिर क्या है देश का मिजाज और क्या है मतदाता की राय। देश की सियासी नब्ज टटोलने के लिए आईबीएन7 अपनी खास पेशकश 'अगर अभी चुनाव हों तो...' के लिए CSDS का देशव्यापी सर्वे लाया है। 5 से 15 जनवरी के बीच CSDS ने देश के 18 राज्यों में ये सर्वे किया। 1081 स्थानों पर जाकर कुल 291 सीटों पर 18591 लोगों के बीच ये सर्वे किया गया।
  • पश्चिम बंगाल
  • अगर अभी चुनाव हों तो पश्चिम बंगाल की 42 सीटों में से तृणमूल कांग्रेस के खाते में 20 से 28 सीटें जा सकती हैं। लेफ्ट को 7 से 13 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस को 5 से 9 और बीजेपी को 0 से 2 सीटें मिल सकती हैं।
  • पहला सवालः क्या ममता सरकार के कामकाज से आप संतुष्ट हैं?
  • जवाबः हां-55%, नहीं-34%, कोई राय नहीं-11%
  • (2013 में इसी सवाल के जवाब में आंकड़े क्रमशः 50, 42 और 8 फीसदी थे।)
  • दूसरा सवालः क्या मुख्यमंत्री के तौर पर ममता बनर्जी संतोषजनक कार्य कर रही हैं?
  • जवाबः हां-60%, नहीं-31%, कोई राय नहीं-9%
  • तीसरा सवालः क्या ममता सरकार को एक और मौका मिलना चाहिए?
  • जवाबः हां-44%, नहीं-30%, कोई राय नहीं-26%
  • (2013 में इसी सवाल के जवाब में आंकड़े थे क्रमशः 43,, 35 और 22 फीसदी थे।)
  • चौथा सवालः क्या केंद्र में यूपीए को एक और मौका मिलना चाहिए?
  • जवाबः हां-29%, नहीं-36%, कोई राय नहीं-35%
  • (2013 में इसी सवाल के जवाब में आंकड़े क्रमशः 40, 29 और 31 फीसदी थे।)
  • 5वां सवालः कौन बने देश का प्रधानमंत्री?
  • जवाबः 18 फीसदी लोगों ने कहा-नरेंद्र मोदी।
  • 09 फीसदी लोगों ने कहा-राहुल गांधी।
  • 03 फीसदी लोगों ने कहा-सोनिया गांधी।
  • 05 फीसदी लोगों ने कहा-मनमोहन सिंह।
  • 11 फीसदी लोगों ने कहा ममता बनर्जी।
  • 03 फीसदी लोगों ने कहा-बुद्धदेव भट्टाचार्य।
  • 01 फीसदी लोगों ने कहा-कोई अन्य।
  • 50 फीसदी लोगों ने इस सवाल पर कोई राय नहीं दी।
  • (2013 में जब ये सवाल पूछा गया कि कौन बने देश का प्रधानमंत्री, तो जवाब था।
  • नरेंद्र मोदी-9%
  • राहुल गांधी-12%
  • सोनिया गाधी-4%
  • मनमोहन सिंह-11%
  • ममता बनर्जी-9%
  • बुद्धदेव भट्टाचार्य-3%
  • अन्य-6%
  • कोई राय नहीं-46%)
  • ------------
  • सवालः पश्चिम बंगाल में किसको कितने वोट मिल सकते हैं?
  • जवाबः कांग्रेस को 19 फीसदी
  • बीजेपी को 14 फीसदी
  • तृणमूल कांग्रेस को 33 फीसदी
  • लेफ्ट को 25 फीसदी
  • आम आदमी पार्टी को 2 फीसदी
  • अन्य को 7 फीसदी
  • 2009 के चुनाव में कांग्रेस को 14 फीसदी वोट मिले थे, और जब पिछले साल जुलाई में लोगों से बात की गई तो कांग्रेस को 22 फीसदी वोट मिलते दिख रहे थे। बीजेपी को 2009 में 6 फीसदी वोट मिले थे और जुलाई 2013 में 12 फीसदी वोट मिलने का अनुमान था। तृणमूल कांग्रेस को 2009 में 31 फीसदी वोट मिले थे, और जुलाई 2013 में 32 फीसदी वोट मिलने का अनुमान था। 2009 में लेफ्ट को 43 फीसदी वोट मिले थे, जुलाई 2013 में 28 फीसदी वोट मिलने का अनुमान था।
  • ओडीशा का सर्वे
  • अगर अभी चुनाव हों तो ओडीशा की 21 सीटों में से बीजेडी के खाते में 10 से 16 सीटें जा सकती हैं। कांग्रेस को 3 से 9 और बीजेपी को 0 से 4 सीटें मिल सकती हैं।
  • कैसा है सरकार का कामकाज? इस सवाल पर उड़ीसा के 67 फीसदी लोग सरकार के कामकाज से संतुष्ट हैं। 29 फीसदी लोग संतुष्ट नहीं हैं जबकि 4 फीसदी लोगों ने कोई राय नहीं दी। यही सवाल जब 2013 में पूछा गया था तो 79 फीसदी लोग संतुष्ट थे। 20 फीसदी लोग संतुष्ट नहीं थे और 1 फीसदी ने कोई राय नहीं दी थी।
  • कैसे मुख्यमंत्री हैं नवीन पटनायक? इस सवाल पर 70 फीसदी लोग नवीन पटनायक से संतुष्ट मिले, 26 फीसदी संतुष्ट नहीं थे जबकि 3 फीसदी ने कोई राय नहीं दी। क्या नवीन सरकार को एक और मौका मिलना चाहिए इस सवाल पर 51 फीसदी लोग नवीन सरकार को एक और मौका देना चाहते थे, 35 फीसदी मौका देने के पक्षधर नहीं थे जबकि 14 फीसदी ने कोई राय नहीं दी। 2013 में इस सवाल के जवाब में 66 फीसदी लोग नवीन सरकार को दोबारा देखना चाहते थे। 29 फीसदी ने एक और मौका देने से इनकार कर दिया और 5 फीसदी ने कोई राय नहीं दी।
  • कौन बने देश का प्रधानमंत्री इस सवाल के जवाब में नतीजे कुछ इस प्रकार मिलेः-नरेंद्र मोदी-33 फीसदी, राहुल गांधी-19 फीसदी, सोनिया गांधी-7 फीसदी, मनमोहन सिंह-3 फीसदी, लालकृष्ण आडवाणी-1 फीसदी, नवीन पटनायक-12 फीसदी, अरविंद केजरीवाल-1 फीसदी, 24 फीसदी ने कोई राय नहीं दी।
  • अगर अभी चुनाव हों तो किसको कितने वोट मिलेंगे? सर्वे के मुताबिक बीजू जनता दल को 33 फीसदी, कांग्रेस को 31 फीसदी, बीजेपी को 25 फीसदी, आम आदमी पार्टी को 1 फीसदी और अन्य को 10 फीसदी वोट मिलेंगे। इन्हें सीटों में तब्दील किया जाए तो ओडिशा की 21 सीटों में से बीजेडी को 10-16 सीटें, कांग्रेस 3-9 सीटें और बीजेपी को 0-4 सीटें मिल सकती हैं।
  • बिहार का सर्वे
  • अगर अभी चुनाव हों तो बिहार की 40 सीटों में से बीजेपी को 16 से 24 सीट मिल सकती हैं। जेडीयू को 7 से 13 सीट जबकि आरजेडी को 6 से 10 सीट मिल सकती हैं। कांग्रेस को 0 से 4 सीट मिल सकती हैं।
  • कैसा है जेडीयू सरकार का काम?
  • संतुष्ट - 59 फीसदी
  • संतुष्ट नहीं - 38 फीसदी
  • कोई राय नहीं - 3 फीसदी
  • (2013 में यही सवाल पूछने पर आंकड़ा था क्रमशः 69, 25 और 6 फीसदी।)
  • ------------------
  • कैसे मुख्यमंत्री हैं नीतीश कुमार?
  • संतुष्ट - 63 फीसदी
  • संतुष्ट नहीं - 36 फीसदी
  • कोई राय नहीं - 1 फीसदी
  • ------------------
  • क्या जेडीयू सरकार को मिले एक और मौका?
  • 55 फीसदी लोगों ने कहा - हां
  • 38 फीसदी ने कहा - नहीं
  • 7 फीसदी ने कोई राय नहीं दी
  • --------------------
  • कौन है बीजेपी-जेडीयू गठबंधन टूटने के लिए जिम्मेदार?
  • जेडीयू-26 फीसदी
  • बीजेपी-20 फीसदी
  • दोनों-39 फीसदी
  • कोई जिम्मेदार नहीं-4 फीसदी
  • कोई राय नहीं-12 फीसदी
  • --------------------
  • क्या केंद्र में यूपीए को मिले एक और मौका?
  • 21 फीसदी ने कहा - हां
  • 70 फीसदी ने जवाब दिया - नहीं
  • 10 फीसदी ने कोई राय नहीं दी
  • --------------
  • कौन है मोदी की रैली में धमाकों का जिम्मेदार?
  • नीतीश सरकार जिम्मेदार - 51 फीसदी
  • नीतीश सरकार जिम्मेदार नहीं - 33 फीसदी
  • कोई राय नहीं - 16 फीसदी
  • --------------
  • क्या लालू को चारा घोटाले के लिए पर्याप्त सजा मिल गई?
  • ज्यादा कठोर - 19 फीसदी
  • पर्याप्त - 46 फीसदी
  • बहुत कम - 19 फीसदी
  • कोई राय नहीं - 16 फीसदी
  • --------------------
  • अगर अभी चुनाव हों तो किसको कितने वोट?
  • कांग्रेस – 11 फीसदी
  • बीजेपी – 39 फीसदी
  • जेडीयू – 20 फीसदी
  • आरजेडी – 15 फीसदी
  • एजेपी – 2 फीसदी
  • आप – 3 फीसदी
  • अन्य – 10 फीसदी
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India Today

Can you recognise this aam aadmi? Well, this is our Delhi CM Arvind Kejriwal spending night outside Rail Bhavan.

http://indiatoday.intoday.in/story/kejriwal-aap-protest-dharna-delhi-police-live-coverage/1/338709.html

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Dilip C Mandal

दिल्ली में सड़क पर संविधान समीक्षा आयोग की बैठक चल रही है. 63 साल के संवैधानिक राज से कुछ लोग बेहद खफा हैं. बहुत घाटा हो गया है. दबदबा घट गया है.

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Abhishek Srivastava shared Uday Prakash's status update.

Uday Prakash

सुबह उठते ही, जब अरविंद केजरीवाल का चेहरा सूजा हुआ था, बीच-बीच में खांसी आ रही थी, आंखें नींद की खुमारी से भारी थीं, आवाज़ भर्राई हुई थी और टीवी चैनल के कर्मचारी उनसे 'अराजकता' वगैरह के बारे में पूछ रहे थे, तब उनका जवाब था - देश की राजनीति बदल रही है. सारा पोलिटिकल डिस्कोर्स बदल रहा है. इस बात को राजनीतिक नेता और मीडिया वाले सीख लें...!' उन्होंने व्यावसायिक मीडिया को सलाह दी कि वे ज़रा जनता से जुड़ें... अगर यह सब कुछ 'नौटंकी' है, तो एक भ्रष्ट और असंवेदनशील हो चुकी व्यवस्था को बदलने के लिए यह 'नौटंकी' ही सबसे प्रभावशाली माध्यम है. उस बासी, वैभवशाली और बंद प्रेक्षागृहों में चलने वाले कपटी रंगमंच का पर्दा धीरे-धीरे गिर रहा है. वे मीडिया स्टार्स जो सारी 'इंडिया' का प्रवक्ता होने का दावा करते हैं, उनके चेहरे इतने फीके और रंगहीन, तमाम मेकअप के बावज़ूद, ऐसे मुर्झाए हुए पहले कभी नहीं दिखे. यह कहने का मन होता है कि आज चाहे रजत शर्मा हों, बरखा दत्त, अर्नब गोस्वामी, राजदीप सरदेसाई या कोई और मीडिया महारथी, वह 'इंडिया' के किसी भी आम आदमी के खिलाफ़, किसी भी विधान सभा या लोकसभा की कांस्टिचुएंसी से चुनाव नहीं जीत सकता. टीवी की 'व्युअरशिप' को 'इंडिया' के साथ कन्फ़्यूज़ करने की गलतफ़हमी के ये लोग ला-इलाज रोगी हैं. वह जन-तंत्र, जिसके अब तक सारे शेयर्स कुछ गिने चुने अमीर घरानों के पास थे, अब शायद जनता उसी जनतंत्र में अपना 'शेयर' मांग रही है. गणतंत्र दिवस को लेकर ऐसी उत्सुकता पहले कभी नहीं हुई, जो अब ब-मुश्किल पांच दिन बाद है.

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Amalendu Upadhyaya

कहां है मिस्टर सुपर क्लीन, ठंड से 12 लोग मर गए.... क्या दिल्ली में भी ठंड से कोई नहीं मरता साइबेरिया की तरह ?

Pankaj Chaturvedi

चोवीस घंटो में १२ लोगो कि ठण्ड से मौत, वह भी उस सरकार में जिसके मंत्री मिडिया के केमरे बुला आकर रात में सडकों पर निरिक्षण करते हें, क्या नेतिकता के आधार पर मंत्री को इस्तीफा नहीं देना चाहिए ?? केजरीवाल तो ऐसी हें मांग करते हें ?? फिलहाल तो लोगों कॉ ध्यान मूल समस्याओं से हटाने के लिए वे पुलिस को गरिया रहे हें

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Jagadishwar Chaturvedi

कांग्रेस को कितने साल बाद पता चला कि जैन समुदाय अल्पसंख्यक है ?

देर से ही सही पर सही फैसला किया कि जैन समुदाय अल्पसंख्यक है।

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  • Anand Dubey Bhashayee bhi ho sakte hain par hamare desh main to keval jaati aur dharm hi sab kuch hain

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  • Arun K Upadhyaya Chunav k samay baudhik shresth ho jate hain rajneta aur rajneetik dal.Dimag kuch zyada hi chalne lgta hai.

  • 11 hours ago · Like

  • Devendra Surjan क्या मूर्तियों के बदले स्वरूप ही अल्पसंख्यक - बहुसंख्यक का फैसला करने के लिए काफी है. क्या हिन्दू सिर्फ इसलिए बहुसंख्यक हैं क्योंकि उनके पास तरह तरह के स्वरूप वाले बहुसंख्य देवी देवता हैं. क्या मूर्ती और पूजा पद्धति से समाजों को परिभाषित किया जाना चाहिए.

  • 10 hours ago · Like

  • संध्या सिंह 2014 के लोकसभा चुनाव को मद्दे नज़र रखते हुए कॉंग्रेस की सरकार ऐसे फ़ैसले ले रही है जो उसे बहुत पहले लेने चाहिए थे /

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Jayantibhai Manani

क्या लोकतंत्र को सफल बनाने के लिए सब से बड़े महत्वपूर्ण अहम् मुद्दे 2014 के लोकसभा चुनाव के अहम् मुद्दे बने है?

1. ओबीसी की जातिवार जनगणना,

2. सरकारी प्रोत्साहन से आगे बढे निजी उद्योगों में ओबीसी, एससी और एसटी के युवाओ को नौकरियों में आरक्षण,

3. 33% महिला आरक्षण बिल में ओबीसी, एससी और एसटी समुदाय की महिलाओ का अलग क्वोटा,

4. सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में ओबीसी, एससी और एसटी समुदायों के लिए आरक्षण,

5. हाईकोर्ट के जज की नियुक्ति में ओबीसी, एससी और एसटी के लिए आरक्षण..

ये सब मुद्दे देश के संविधान के राजनीति के सिध्धांतो के अनुकुल है.

5. देश में जन संख्या के आधार पर केंद्र और राज्यों में ओबीसी समुदाय को नौकरियों में और शिक्षा में पर्याप्त प्रतिनिधित्ववाले आरक्षण का प्रावधान...

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Mohan Shrotriya

‪#‎दुधारी‬ तलवार पर चल रहे हैं, अरविंद केजरीवाल !


इसके परिणाम को लेकर, पता नहीं जनता भी वैसे ही असमंजस में है या नहीं, जैसे में मैं हूं !


खेल तो तीनों ही खेल रहे हैं -- भाजपा, कांग्रेस और खुद ‪#‎आप‬ भी. देखें किसका गणित सही निकलता है ! यह एकदम साफ़ है कि इस खेल का ताल्लुक अब सिर्फ़ उस दिल्ली से नहीं है, जिसके मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हैं, बल्कि उस ‪#‎दिल्ली‬ के सिंहासन से है, जिस पर बैठकर, समूचे देश का भाग्य नियंत्रित किया जाता है !

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  • Musafir D. Baitha, Navneet Pandey, विबुधेश यादव and 74 others like this.

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  • Ravinder Goel is khel mein koi jeete par mujhe lagta hai police ke charitra aur shashak shoshak aur police ke gathjor ka jitna khullam khulla prachar ho raha hai wo aam logon ki samajh ko badhayega aur kam ya jyada police par lagam lagayega

  • 2 hours ago · Like

  • Mohan Shrotriya पुलिस शासक वर्गों के हितों की हिफ़ाज़त के लिए ही होती है. शासक वर्गों का चरित्र बदलेगा तो पुलिस की भूमिका भी तदनुरूप बदलेगी.#Ravinder Goyal

  • about an hour ago · Like

  • Ravinder Goel han mohan shrotriya ji bilkul sahi kaha par jo hindustan ki police kar sakti hai/karti hai wo europe etc mein nahin kar sakti jahan ka shashak varg mature bhi hai aur majboot bhi. waisi hamari police is system mein un jaISI ho payegi ya nahin main ...See More

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  • Pradeep Tewari वे अब यह साबित करना चाहते है कि वे आवारगी का शिकार है और सरकार चलाना उनके वस् में नहीं है.

  • 48 minutes ago · Like

Ashok Kumar Pandey

वो लडकियाँ शिकार थीं - योगेन्द्र जी.


इसीलिए अँधेरा होने के बाद महिलाओं को गिरफ्तार करने पर जोर दिया गया. सड़क पर मूत्र सैम्पल लिए गए. बिना ऍफ़ आई आर के गिरफ्तार करने की जिद की गई.


वैसे ठीक यही आपको समर्थन दे रहे उन लोगों के साथ करने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पा रहे जिनके खिलाफ़ आप कल तक सबूत देने के दावे कर रहे थे.


यह गुंडागर्दी जिन 'आम आदमियों' को संतुष्ट करने के लिए आप कर रहे हैं टीवी पर उनका कहा उनके नस्लभेद की गवाही दे रहा है योगेन्द्र जी. यूथ फार इक्वालिटी के फेसिलिटेटर रहे आपके नेता से और उम्मीद भी क्या की जाती. आफेंस इज द बेस्ट डिफेन्स की यह नौटंकी आपको वोट ज़रूर दिला देगी लेकिन...खैर लेकिन की फ़िक्र कहाँ है आप लोगों को?

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  • Jagadishwar Chaturvedi, Mohan Shrotriya, Shabnam Hashmi and 47 otherslike this.

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  • Ashok Kumar Pandey Sharad Shrivastav bhai दूध के जालों को छाछ भी फूंककर पीनी चाहिए।

  • 3 hours ago · Like

  • Prabhat Pandey यह नौटंकी आपको वोट ज़रूर दिला देगी ..... बाकी, जो होता रहा है वह उससे भी बद्तर गोकि 'आप' के सपनों के मुताबिक.

  • 2 hours ago · Like · 1

  • Mahender Singh Ashok Kumar Pandey ji आप अंधे मत होइए, आँखे खोलिए, वामपंथी लफ़फाजी से लोग तंग आ चुके हैं

  • 2 hours ago · Like

  • Shirish Kumar Mourya सड़क पर महिलाओं से मूत्र के नमूने लेना किस तरह का जनहित है - थू है..... जिस मीडिया को सोमनाथ जी साथ रखे हुए थे, उसी ने इस प्रकरण के फुटेज भी लिए है पर वे इतने अशोभनीय हैं कि.................

  • about an hour ago · Like

Devinder Sharma

When I protested along with people on the streets of Seattle at the WTO Ministerial in 1999, I was called an anarchist; when I question the economics of G-20 or G-8 I am again called an anarchist; when I raise pointers to the flawed economic policies of Govt of India, I am labelled as being anti-development; when I oppose GM crops I am called luddite; and when I lead the people's protest against an unwanted Petro SEZ at Mangalore, I am called a naxalite. In others words, if you talk of and for people, you are a threat to the nation. I don't mind whatever tag is bestowed as long as I feel that justice is not being done. My fight will go on.

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Jayantibhai Manani via Ramesh Mimrot

संसदीय लोकतंत्र में देश के पीएम बनाने का या राज्य के सीएम बनाने का संवैधानिक अधिकार कोई पार्टी या जाति संगठन को नहीं दिया गया है लेकिन सांसद और MLA को दिया गया है. RSS के कट्टर जातिवादी ब्राह्मण नेताओ लोकतंत्र और देश के संविधान के घोर शत्रु रहे है और है. देश का पीएम क्या संघ के ब्राह्मण सर संघचालक भागवत तय करेंगे या 2014 के लोकसभा के चुनाव में चुनकर संसद में आनेवाले सांसद?

'Casteist, elitist' Congress doesn't want to pit Rahul Gandhi against 'tea boy': Narendra Modi -...

timesofindia.indiatimes.com

Terming Nehru-Gandhi family elitist and anti-OBC, Modi said their feudal mindset, casteist prejudices were real reasons why Cong did not project Rahul as PM candidate.

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Nityanand Gayen

http://khabar.ndtv.com/video/show/khabron-ki-khabar/306119

खबरों की खबर : बेरुखी की मार झेलते मिचर्पुर के दलित वीडियो - हिन्दी न्यूज़ वीडियो एनडीटीवी ख�

khabar.ndtv.com

खबरों की खबर : बेरुखी की मार झेलते मिचर्पुर के दलित हिन्दी न्यूज़ वीडियो। एनडीटीवी खबर पर देखें समाचार वीडियो खबरों की खबर : बेरुखी की मार झेलते मिचर्पुर के दलित हरियाणा के मिर्चपुर गांव में करीब चार साल पहले दलितों के घर जलाए गए। अगड़ी जातियों के खौफ से वे लोग भागकर हिसार के एक शिविर में रह रहे हैं।...

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Aam Aadmi Party

30 minutes ago

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,

मेरी कोशिश ये है के सूरत बदलनी चाहये|


Arvind Kejriwal calls off protest after Delhi Lieutenant Governor sends errant S.H.O's on leave. First step towards police accountability to people.


We won't stop our fight against corruption. We are here to change the system. We will deliver what we had promised.


Jai Hind. — with Sarabjot Singh Dilli and 3 others.

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  • Samit Carr and 3,347 others like this.

  • Palash Biswas http://www.hastakshep.com/.../%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5...

  • न कोई दुर्योधन मारा जायेगा और न दुःशासन, युधिष्ठिर मिथक था और रहेगा

  • www.hastakshep.com

  • युधिष्ठिर की भूमिका में तब भी दुर्योधन का डबल रोल था और आज भी है साहित्य पर हावी...See More

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  • Aashiq Aawara संसद में हमारे सांसद ब्लू फिल्म देखते हुए पकडे गये, अराजकता नहीं फैली ! संसद में सांसदों ने रिश्वतखोरी के नोटों के बंडल लहराए मगर अराजकता नहीं फैली ! कांग्रेस का नेता नारायण दत्त तिवारी तीन-तीन वेश्याओ के साथ पकड़ा गया, वो अराजकता नहीं थी ! अभिषेक मनु सिंघवी ऐसे ही कारनामे में लिप्त था, तब भी अराजकता नहीं फैली ! भवरी देवी केस में मदेरणा हत्यारा,बलात्कारी पाया गया, तभी अराजकता का प्रशन नहीं आया ! भाजपा के राघव जी अपने नौकर से ही सम्बन्ध बनाते पकडे गये मगर भाजपा ने उसे भी 'अनैतिक-राष्ट्रवादी' मान लिया, अराजकता नहीं फैली ! फूलन देवी डाकू सांसद और राबड़ी देवी जैसे अंगूठाछाप मुख्यमत्री बन गईं,मगर अराजकता नहीं फैली ! राजा भइया, मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद,लालू यादव,मुलायम यादव जैसे चोर,गुंडे,घोटालेबाज़ संसाद बन गये मगर अराजकता तब भी नहीं फैली...यदुरप्पा,निशख,कलमाड़ी,कनोमोज़ी ने हजारो करोड का घोटाला करके देश पर महंगाई थोप दी, दिल्ली पुलिस ने बाबा रामदेव को सन्यासी से शलवार कुरता पहन कर दम दबाकर भागने पर मजबूर कर दिया लेकिन अराजकता थी की फैलने का नाम ही नहीं ले रही थी ! दिल्ली पुलिस रेडी वालों से लेकर रेड लाइट के दलालों तक से पैसा खाने में इमानदारी से लगी है मगर कमबख्त अराजकता नहीं फैली इसलिए दोस्तों...यकीन कीजिये...भ्रस्त,निकम्मी,रिश्वतखोर पुलिस और राजनीती को ठीक करने में अरविन्द ने जो हिम्मत दिखाई है, उससे भी अराजकता नहीं फैलेगी..अरविन्दने कहा था, राजिनित अगर कीचड़ है तो इस कीचड़ में उतरना ही पड़ेगा...हाँ..भाजपाइयों और कांग्रेसी के लिए ये अराजकता ज़रूर है...अब इसका एक ही इलाज है...पानी पीकर अरविन्द को गालियां और डिस्प्रिन की 2-2 सुबह-शाम गोलियां

  • Like · Reply · 167 · 29 minutes ago

  • Rahul Arora संसद में हमारे सांसद ब्लू फिल्म देखते हुए पकडे गये, अराजकता नहीं फैली ! संसद में सांसदों ने रिश्वतखोरी के नोटों के बंडल लहराए मगर अराजकता नहीं फैली ! कांग्रेस का नेता नारायण दत्त तिवारी तीन-तीन वेश्याओ के साथ पकड़ा गया, वो अराजकता नहीं थी ! अभिषेक मनु सिंघवी ऐसे ही कारनामे में लिप्त था, तब भी अराजकता नहीं फैली ! भवरी देवी केस में मदेरणा हत्यारा,बलात्कारी पाया गया, तभी अराजकता का प्रशन नहीं आया ! भाजपा के राघव जी अपने नौकर से ही सम्बन्ध बनाते पकडे गये मगर भाजपा ने उसे भी 'अनैतिक-राष्ट्रवादी' मान लिया, अराजकता नहीं फैली ! फूलन देवी डाकू सांसद और राबड़ी देवी जैसे अंगूठाछाप मुख्यमत्री बन गईं,मगर अराजकता नहीं फैली ! राजा भइया, मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद,लालू यादव,मुलायम यादव जैसे चोर,गुंडे,घोटालेबाज़ संसाद बन गये मगर अराजकता तब भी नहीं फैली...यदुरप्पा,निशख,कलमाड़ी,कनोमोज़ी ने हजारो करोड का घोटाला करके देश पर महंगाई थोप दी, दिल्ली पुलिस ने बाबा रामदेव को सन्यासी से शलवार कुरता पहन कर दम दबाकर भागने पर मजबूर कर दिया लेकिन अराजकता थी की फैलने का नाम ही नहीं ले रही थी ! दिल्ली पुलिस रेडी वालों से लेकर रेड लाइट के दलालों तक से पैसा खाने में इमानदारी से लगी है मगर कमबख्त अराजकता नहीं फैली इसलिए दोस्तों...यकीन कीजिये...भ्रस्त,निकम्मी,रिश्वतखोर पुलिस और राजनीती को ठीक करने में अरविन्द ने जो हिम्मत दिखाई है, उससे भी अराजकता नहीं फैलेगी..अरविन्द ने कहा था, राजिनित अगर कीचड़ है तो इस कीचड़ में उतरना ही पड़ेगा...हाँ..भाजपाइयों और कांग्रेसी के लिए ये अराजकता ज़रूर है...अब इसका एक ही इलाज है...पानी पीकर अरविन्द को गालियां और डिस्प्रिन की 2-2 सुबह-शाम गोलियां ...

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Aam Aadmi Party

about an hour ago

Lathi charge by Delhi Police at Rail Bhawan on Aam Aadmi.


Is Delhi Police for this purpose? When are they sitting when "Common Man" of Delhi need them?

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Aam Aadmi Party

4 hours ago

Some moments from Day 1 and day 2 of protest....

We will fight till the change is here.


धरने के पहले और दूसरे दिन से कुछ पल....

लड़ेंगे जीतेंगे| — with Rahul Kapoor and 2 others.

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Aam Aadmi Party

6 hours ago

Why #AAP is protesting?

Do you know why #AAP is protesting? There were several back to back incidents related to women's safety which forced the #AAP government to rethink whether the Delhi Police was there to protect citizens or to harass them.


Apart from the rape of a Danish Women in Central Delhi and inaction against drug and sex racket in Malviya Nagar, the Women & Child, Social Welfare and Languages minister of Delhi, Rakhi Bildan, protested against burning of a women in Sagarpur for Dowry and...See More

— withAryan Saurabh and 7 others.


Aam Aadmi Party

7 hours ago

Congress and BJP trying to disrupt peaceful #AAP protest. Yesterday BJP activists and Hindu Raksha Dal members had disrupted proceedings. Today Shahzaad Poonawal from Congress also made attempts to disrupt the peaceful protest, being held to empower the citizens of Delhi.


Such incidents raise questions about the intentions of these mainstream political parties.


What do you think? What is their motive? — with Mansi Mohanty and 3 others.

Aam Aadmi Party

8 hours ago

Have you or anyone you know ever been subjected to harassment by cops for not paying bribe? If yes, click 'Like' and if you have a video, post it's link in the comments.

||

क्या कभी आपको या आपके किसी जानने वाले को रिश्वत ना देने के कारण पुलिसवालों ने परेशान किया है? अगर हाँ तो 'लाइक' क्लिक करें और आपके पास ऐसा कोई विडियो है तो उसका लिंक कमेंट में डालें.

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  • Prem Sundriyal and 6,537 others like this.

  • Shahil Raj दिल्ली पुलिस, दिल्ली वालों के लिए धोखा है! यदि दिल्ली पुलिस, दिल्ली की जनता ( दिल्ली का CM ) की नही सुनती, तो दिल्ली पुलिस का नाम बदल कर शिंदे पुलिस/ सेन्ट्रल पुलिस/ करप्ट -नेता-पुलिस रखा जाना चाहिए ! ऐसा सिस्टम दिल्ली वालो के लिए धोखा है. यह सिस्टम सि...See More

  • Like · Reply · 238 · 8 hours ago

  • D.c. Srivastava मीडीया के गंदे लोगो।.....बाज़ आओ।....अपनी रोटिया मत सेंको।.....सरकार की नीयत समझो।.....पत्थर फेंकने वाले 'आप' के कार्यकर्ता नहीं।....बी जे पी और कॉंग्रेस पार्टी या अन्य के गंदे लोग है।....जो "आप" को बदनाम कर रहे है.....या कुछ आसामाजिक तत्व होंगे.....पहचान करो और सजा दो.....सरमान अरविंद जी प्लीज़ संज्ञान मे ले कार्यकर्ताओ को आदेश दे अपने पॉकेट CCTV कॅमरास को ऑन रखे ये घटिया सरकारी लोग कुछ भी करवा सकते है।.....

  • Like · Reply · 213 · 6 hours ago · Edited


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Aam Aadmi Party

10 hours ago

If some four people protest in front of Shinde's house, and a window gets broken, then he will suspend policemen. But if a women is burnt alive or gangraped, or if someone is running a sex racket, he won't suspend anyone," Manish Sisodia. — with Priya Sharma and 8 others.

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Aam Aadmi Party

10 hours ago

Why is #AAP protesting? Case 1 - Dowry deaths!

Do you know why #AAP is protesting? There were several back to back incidents related to women's safety which forced the #AAP government to rethink whether the Delhi Police was there to protect citizens or to harass them.


Apart from the rape of a Danish Women in Central Delhi and inaction against drug and sex racket in Malviya Nagar, the Women & Child, Social Welfare and Languages minister of Delhi, Rakhi Bildan, protested against burning of a women in Sagarpur for Dowry and...See More

Aam Aadmi Party

12 hours ago

Rain and Thunderstorm in Delhi but protests continue at Rail Bhawan. People have joined in huge numbers but were stopped due to the barricades.


"I appeal to all the people from Delhi to take a day off from work and join the dharna, sit on dhrana wherever you are stopped," Arvind Kejriwal. — with Kamal Bhattacharya and 10 others.


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Aam Aadmi Party

17 hours ago

On the other side of this barricading Arvind Kejriwal and few hundred other protesters, including #AAP MLA's and Ministers are spent the night on road in this chilly Delhi winter.


For whom are they doing this? For what are they protesting?


All they demand is an accountable Delhi police. A police force which does not shy away from its responsibility if someone is raped. A police force which does not refuse to file FIR of a dowry victim. A police force which does not give excuses for not raiding a place from where a drug and sex racket is being operated.


#AAP wants solutions to problems and lame excuses won't do. Support #AAP in this endeavor, join the protest at Rail Bhawan at 9am. — withJose Murickal and 9 others.

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Aam Aadmi Party

Yesterday

Foreign affairs minister Salman Khurshid has come on record saying that no letter came from Ugandan Embassy and furthermore denies the existence of a Ugandan Embassy altogether. However #AAP has documents which show otherwise.


Please find attached letter from an Ugandan lady to the Ugandan High Commission. This letter written in May-June 2013, clearly points out that a human trafficking problem exists.


The letter's high resolution copy along with a letter written from the D...See More — with Abhinav Gupta and 12 others.

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Aam Aadmi Party

Yesterday

#AAP MLA from Model Town Akhilesh Tripathi was beaten up by the police and has now been taken to the RML hospital. News also coming in that Delhi Transport minister and Greater Kailash MLA Saurabh Bhardwaj has been detained. Reportedly Sanjay Singh and Ashutosh also had confrontation with the police while trying to reach the dharna venue.


Use #KrantiKariAAPGovt on twitter! — with Sukhi Sniper Harry and 6 others.

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Aam Aadmi Party

Yesterday

Is Delhi police responsible only for security of those living in Lutyens Zone bungalows?


We are not Sheila Dixit government who will still while the women of the city are being raped, burnt for dowry and illegal drug and sex racket is in full swing.


We will act and make sure that there is accountability within the system!


Join Arvind Kejriwal at Rail Bhawan crossing in Dharna. — with Ravi Raj Dhaka and 10 others.

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Yashwant Singh

लगता है केजरीवाल को सलाम कहने रेल भवन तक चलना पड़ेगा... अपने घरों में कैद रहने वालों, फेसबुक-ट्विटर के जरिए क्रांति क्रांति चिल्लाने वालों से लाख गुना अच्छा है यह केजरीवाल... सत्ता मिलने के बाद भी सड़क पर सोया है बहादुर... जिन्हें ये नौटंकी और अराजकता लगती है, वो या तो नादान लोग हैं या फिर बहुत चालाक... ये पुलिस, ये नेता, ये अफसर मान चुके हैं कि देश किन्हीं घुरहू कतवारू या हमारा आपका नहीं बल्कि इन नेताओं, अफसरों, मंत्रियों के बाप का है... और, वे नहीं चाहते कि उनकी एलीट दुनिया, उनके एलीट धंधों में कोई दखल हमारे आपके बीच का आदमी दे... वो तो बस एक बात चाहते हैं कि अगर आ ही गए हो एलीट सर्किल में तो चुपचाप यहां के मजे लूटो ... पर केजरीवाल तो अदभुत निकला भाई... एलीटों के बीच पहुंचकर आम आदमियों की बातें कर रहा है, उनके लिए लड़ रहा है... कांग्रेस और भाजपा वाले फिर ऐतिहासिक गल्ती और ऐतिहासिक अनदेखी कर रहे हैं... जैसे, पिछले आंदोलनों से केजरीवाल दिल्ली विधानसभा चुनाव का नायक बन बैठा, उसी तरह अब यह आंदोलन केजरीवाल को लोकसभा चुनाव का किंग बना देगा... और जब केजरीवाल लोकसभा चुनाव के किंग बन बैठेंगे तो फिर ये नेता बयान देते फिरेंगे कि हमें केजरीवाल से सीखना चाहिए... पर, फिलहाल तो ये नहीं सीख रहे क्योंकि विनाश काले विपरीत बुद्धि...

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  • Surendra Grover, Subhash Gautam, प्रयाग पाण्डे and 188 others like this.

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  • Peeyush Singh Rao आप की राय से पूरी तरह असहमत। वो बात बात पर U टर्न ले रहे है। उन्हें दिल्ली पुलिस से परेशानी है इसके समाधान के और भी रास्ते है। और इस्पेशली इस केस में तो उनके मंत्री की साफ़ साफ़ गलती दिखाई दे रही है। मुझे लग रहा है आप पूरे देश को गलत पढ़ रहे है यह बात नोट कर के रख ले उनके इस ड्रामे से देश में उनकी फोलोविग काफी घटी है।

  • 5 hours ago · Edited · Like · 1

  • Naveen Naveen Kejriwal se itni jalti kyon hain logo ki ...or ek mahasay ghandi se tulna karne wale ko murkh bata rahe hain ..pata nahi unhone gandhi ke bare me kitni samajh me mujhe nahi pata kanhi unke gandhi ka matlab rahul gandhi se to nahi hai...ek bat man ke ki...See More

  • 4 hours ago · Like · 1

  • Rps Gautam अभी अभी इंडिया न्यूज़ पर एक वरिष्ठ वकील ने ये खुलासा किया है कि जिस युगांडा की महिलाओं के साथ बत्तमीजी के आरोपी मंत्री "सोमनाथ भारती" को बचाने के लिए केजरीवाल जी दिल्ली पुलिस पर ही आरोप लगा रहे हैं और धरना प्रदर्शन कर रहे हैं वो मंत्री उन युगांडा की महि...See More

  • about an hour ago · Like

  • Shachindra Trivedi itne jhuth to bjp aur congress ne mil kar nahi bole the

  • 10 minutes ago · Like

Yashwant Singh

ये भाजपा वाले केजरीवाल से अगर कुछ सीख सकते हैं तो सीख लें... बेचारे, सबसे ज्यादा सीट पाकर भी दिल्ली की सत्ता नहीं हासिल कर सके और अब तो विपक्ष की भूमिका भी सत्ताधारी 'आप' ने छीन ली... ये कहीं के नहीं रहे... खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे, सो ये और इनके पेड एजेंट दिन रात फेसबुक ट्विटर पर केजरीवाल का तंबू उखाड़ने और केजरीवाल को गरियाने में लगे हुए हैं... दोस्तों, जो दिन रात अपने वॉल पर केवल केजरीवाल को गाली लिखता रहे, भांति भांति एंगल से, तो समझ लेना वो भाजपा का पेड एजेंट है.... ऐसे एजेंटों से सावधान और केजरीवाल को सलाम...

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  • Surendra Grover, Salman Rizvi, Subhash Gautam and 162 others like this.

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  • Sandesh Dixit इश्क-ए-मोदी ने तुम्हे दीवाना किया इस कद र

  • के सही गलत की समझ ही गवां बैठे

  • 2 hours ago · Like · 1

  • Dushayant Shaarma ये आप ग़लत बोल रहे हैं की अगर कोई केजरीवाल के विरुढ़ लिख रहा है तो वो भाजपा का पैड एजेंट है. मैं किसी भी पार्टी का सदस्य नहीं हूँ, मगर केजरीवाल के विरुढ़ लिखता हूँ. इस लिहाज़ से तो आप भी 'आप पार्टी' के पैड एजेंट (सॉरी ईस शब्द का यूज़ करने के लिए) हुए.

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  • Vivek Joshi सुन चंपा सुन तारा कोई जीता कोई हारा ?

  • ...आकलन कठिन ही नहीं बेहद उलझा है..इसलिये कि भाजपा कांग्रेस और खुद आप के लिये यह लडाई नाक का बाल बन गयी थी..

  • ...जहां तक कांग्रेस का सवाल है उसने ना केवल सौ प्याज भी खाये और सौ कोडे भी..सजा यह थी कि पहले क्या खाआगे ...See More

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  • Arif Beg Aarifi agar koi vyakti sahi karna chahta hai to isme logo ko problem kis bat ki hai akhir.delhi me kejriwal ka wahi hal hai jisey ek chorahe pe khada kar diya or jaha ek raste per bjp ek per cngres ek taraf police or dursi taraf media khadi or usse kaha ja raha bina kisi ko hatae ya nuksan pahuchaye janta tak pahuch kr dikhao or kam karo

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Yashwant Singh

प्रेस क्लब आफ इंडिया में अरविंद केजरीवाल एंड कंपनी की बैठक को लेकर प्रेस क्लब में दो फाड़ हो गया है. अग्रेजी अखबार के कुछ लोग इस बात पर आपत्ति कर रहे हैं कि अरविंद केजरीवाल को अंदर घुसने क्यों दिया गया. प्रेस क्लब के आसपास बैरीकेडिंग लगाए खड़े सैकड़ों पुलिस वाले लगातार प्रेस क्लब के भीतर आकर हग-मूत रहे थे, पर तब किसी ने उन पर आपत्ति नहीं की. लेकिन जब प्रेस क्लब में अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम के लोग आए तो कई अंग्रेजी पत्रकारों के पेट में मरोड़ उठ गया. सूचना तो यहां तक है कि पेड मीडिया की एजेंट एक महिला पत्रकार ने एक रोज पहले राखी बिड़लान के प्रेस क्लब में आकर टायलेट यूज करने को लेकर न सिर्फ आपत्ति जताई और हो-हल्ला मचाया बल्कि उन्हें टायलेट यूज किए बिना बाहर जाने को मजबूर कर दिया. इस घृणित घटनाक्रम की सूचना पाकर कई वरिष्ठ हिंदी पत्रकारों ने महिला पत्रकार की गुंडई पर आपत्ति जताई. सूत्रों के मुताबिक इस महिला पत्रकार की हरकत के बारे में पता किया जा रहा है और इनकी सदस्यता रद्द करने को लेकर प्रेस क्लब की बैठक बुलाए जाने की तैयारी की जा रही है. कुछ पत्रकारों का कहना है कि जब कांग्रेस या भाजपा के लोग प्रेस क्लब में आते हैं तो उनते लिए पलक पांवड़े बिछाए जाते हैं. पर जब आंदोलनरत आम आदमी पार्टी के सीएम अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्री अंदर आते हैं तो कई पत्रकार खुलेआम विरोध शुरू कर देते हैं. क्या सिर्फ इसलिए कि आम आदमी पार्टी के लोग कांग्रेस भाजपा की गुंडई के खिलाफ लड़ रहे हैं... क्या सिर्फ इसलिए कि आम आदमी पार्टी के लोग पत्रकारों को उतना ओबलाइज नहीं करते जितना कांग्रेस भाजपा के लोग करते हैं.... आज पूरी शाम प्रेस क्लब में इसी बात की चर्चा होती रही कि क्यों अंग्रेजी मीडिया के ढेर सारे लोग इन दिनों आम आदमी पार्टी के खिलाफ किसी एजेंडे के तहत दुश्मन के रूप में काम कर रहे हैं...

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