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Memories of Another day

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While my Parents Pulin babu and Basanti Devi were living

Friday, May 6, 2016

प्रतिरोध का अंतिम द्वीप भी बेदखल? कभी नहीं।नहीं। फिरभी गौतम बुद्ध,बाबासाहेब और शहीदेआजम भगतसिंह के रास्ते समता न्याय की सामाजिक क्रांति संभव। #Fightback JNU # Fightback Jadavpur,हर हमले केखिलाफ गोलबंदी होगी तेज और इंसानियत का मुल्क साथ है। केसरिया सुनामी के शिकंजे में बुरी तरह फंसा है बंगाल और बाकी देश के लिए यह डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने की खबर से ज्यादा बुरी खबर है कि सत्तापक्ष को वोट देने वाला बंगाल का हर शख्स अब हिंदुत्व के केसरिया रंग से रंगकर बजरंगी है । मोदी दीदी गठबंधन की वजह से पिछले पांच साल के दौरान बंगाल का भीतर ही भीतर जबर्दस्त केसरियाकरण हुआ है और उत्तरबंगाल में सूपड़ा साफ होते देख केसरिया सुनामी के जरिये सत्ता में वापसी की जुगत में भाजपा को सीटों की खैरात के साथ खुल्ला खेलने का जो मौका दिया गया,उससे दक्षिण बंगाल में कमसकम बीस फीसद वोट भाजपा के हक में गिरे ताकि वाम कांग्रेस गठबंधन को हराकर यूपी को नये सिरे से केसरिया बनाने का राजमार्ग खुले।

प्रतिरोध का अंतिम द्वीप भी बेदखल?

कभी नहीं।नहीं।

फिरभी गौतम बुद्ध,बाबासाहेब और शहीदेआजम भगतसिंह के रास्ते समता न्याय की सामाजिक क्रांति संभव।

#Fightback JNU # Fightback Jadavpur,हर हमले केखिलाफ गोलबंदी होगी तेज और इंसानियत का मुल्क साथ है।

केसरिया सुनामी के शिकंजे में बुरी तरह फंसा है बंगाल और बाकी देश के लिए यह डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने  की खबर से ज्यादा बुरी खबर है कि सत्तापक्ष को वोट देने वाला बंगाल का हर शख्स अब हिंदुत्व के केसरिया रंग से रंगकर बजरंगी है ।

मोदी दीदी गठबंधन की वजह से पिछले पांच साल के दौरान बंगाल का भीतर ही भीतर जबर्दस्त केसरियाकरण हुआ है और उत्तरबंगाल में सूपड़ा साफ होते देख केसरिया सुनामी के जरिये सत्ता में वापसी की जुगत में भाजपा को सीटों की खैरात के साथ खुल्ला खेलने का जो मौका दिया गया,उससे दक्षिण  बंगाल में कमसकम बीस फीसद वोट भाजपा के हक में गिरे ताकि वाम कांग्रेस गठबंधन को हराकर यूपी को नये सिरे से केसरिया बनाने का राजमार्ग खुले।

पलाश विश्वास


Resist saffronisation of campus!

HCU se, JNU se, DU se, JU se, AMU, Bharat se hallabol!

BJP-AVBP-RSS pe hallabol!

Inquilaab Zindabaad!

‪#‎ResistAVBP‬

‪#‎FightbackJU‬

‪#‎FightbackJNU‬

‪#‎FightbackHCU

‪#‎FightbackDU‬‬

‪#‎FightbackAMU

‪#‎FightbackIIT

‪#‎FightbackIIM


संसद और विधानसभाओं में पांच साल में हजार गुणा संपत्ति बढ़ानेवाले सत्तावर्ग के चुने हुए फर्जी जनप्रतिनिधियों के राजकाज मनुस्मृति शासन में न्यायपालिका अभी जिंदा होने का सबूत यदा कदा दे रही है तो जाहिर है कि जल जंगल जमीन नागरिकता और मानवाधिकार की लड़ाई अभी बाकी है।


यह लड़ाई जेएनयू में जैसे लडी जा रही है वेसै ही यह लड़ाई बंगाल के तमाम विश्वविद्यालयों और बाकी देशके विश्वविद्यालयों और दूसरे शैक्षणिक संस्थानों में लडी जा रही है।जाहिर है कि देशी विदेशी पूंजी,मुक्त बाजार और रंग बिरंगे वैश्विक फासीवादी मनुस्मृति रंगभेदी स्थाई बंदोबस्त के खिलाफ हमारे पुरखों की लड़ाई अभी खत्म हुई नहीं है।


NUSU Indifinite Hunger Strike Day 10 (06.05.2016) : Artists, Intellectuals, Actvists joined at Freedom Square JNU in Solidarity with JNUSU.

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने ममता राज के तहत बुलंद हौसले के साथ फिर यादवपुर विश्वविद्यालय पर हमला बोला।हिंदुत्व एजंडा के तहत फिल्म शो के विरोध पर छात्रों के साथ मारपीट और छात्राओं से बदसलूकी चुनावी हिंसा में बहती खून की नदियों से भयंकर केसरिया सुनामी है और सत्तादल की मदद से हावड़ा से जीतनेवाली फिल्मस्टार अभिनेत्री ने दस मिनट का अल्टीमेटम यादवुर विश्वविद्यालय का गेट तोड़ने का जारी करके यह सारा हंगामा कर दिखाया और बता दिया कि संघ परिवार की बढ़ती ताकत और खुल्लमखुल्ला मोदी दीदी गठबंधन गठबंधन से भारत विभाजन के डाइरेक्ट एक्शन की पुनरावृत्ति फिर बंगाल में करने पर तुला है।तो प्रतिरोध में छात्राएं आगे रहीं और छाताराओं ने रूपा और बजरंगियों को मुंह तोड़ जवाब दिया।पाशे आछि यादवपुर।फािट बैक यादवपुर।

इसकी प्रतिक्रिया यहः

রূপা গাঙ্গুলি বলেছে, ''১০ মিনিট দেখব, তা না হলে গেট ভেঙ্গে দেবো''। রূপা গাঙ্গুলি জানে না, যাদবপুর এর গেট ভাঙ্গা তাও সহজ, ব্যারিকেড ভাঙ্গা অসম্ভব।

এক ছাত্র বলল , ''সামনের বার যাদবপুর ইলেকশনে, দেখে নেবে''। ও জানে না, যাদবপুরে এরকম হুমকি ওর বাপ দাদারা বহুবার দিয়েছে।

কমরেডরা ছুটছে সাম্প্রদায়িক শক্তি কে রুখতে। লড়াই এর আঁচ নিন চোখে-মুখে। শনিবার অর্থাৎ কাল, বিকেল ৫ টায় দেখা হবে আবার যাদবপুরের বুকে।


সঙ্ঘের লোকজনদের অনেক অনেক বাঁদরামি দেখেছি, আর এস এস এর হাতে সায়েন্স সিটির সামনে মার খেয়েছি… জে এন ইউ তে ছাত্রছাত্রিদের দেশদ্রোহী বলে ট্যাগিয়ে দিতে দেখেছি, কিন্তু আজ যা দেখলাম, তাতে স্তম্ভিত হতে হয়… বাইরের থেকে লকজন ঢুকে আমাদের শাসিয়ে গেল দেখে নেবে বলে, খিস্তি মারলো, মেয়েদের বুকে হাত দিল, ধাক্কা মারলো আর আঙুল উঁচিয়ে বলে গেল…"মেয়েছেলে হয়ে কথা বলিস কি করে?"… এত ঔদ্ধত্ত্ব আসে কথা থেকে! সাহস হয় কি করে আমাদের নিজেদের ক্যাম্পাসে ঢুকে আমাদের থ্রেট করে যায়? পুলিশ এসে যা করার তাই করলো, আমরা যাদের চিহ্নিত করলাম হেনস্থাকারী হিসেবে, পুলিশের হাতে তাদের তুলে দেওয়ার সাথে সাথেই তাদের 'অসুস্থ' বলে বাঙ্গুর হাসপাতালে নিয়ে গেলো, অথচ আমাদের কেউ পুলিশের খাতায় নাম তুললে আমাদের নিয়ে যাওয়া হয় কাস্টডিতে…মার খেয়ে মাথা ফাটিয়ে দিলেও… বাহ, বেশ অবস্থা তো। ভালোই চলছে আমাদের স্বাধীন রাষ্ট্র, ভালোই রয়েছি শিক্ষা প্রাঙ্গনে… একেই কি বলে ক্যাম্পাস ডেমোক্রেসি?

प्रतिरोध का अंतिम द्वीप भी बेदखल?

फिरभी गौतम बुद्ध,बाबासाहेब और शहीदेआजम भगतसिंह के रास्ते समता न्याय की सामाजिक क्रांति संभव।

#Fightback JNU # Fightback Jadavpur,हर हमले केखिलाफ गोलबंदी होगी तेज और इंसानियत का मुल्क साथ है।

केसरिया सुनामी के शिकंजे में बुरी तरह फंसा है बंगाल और बाकी देश के लिए यह डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने  की खबर से ज्यादा बुरी खबर है कि सत्तापक्ष को वोट देने वाला बंगाल का हर शख्स अब हिंदुत्व के कसरिया रंग से रंगकर बजरंगी है ।


एबीपी आनंद की खबर हैः

সিনেমা ঘিরে রণক্ষেত্র যাদবপুর, এবিভিপি-র সঙ্গে পড়ুয়াদের হাতাহাতি, বহিরাগতদের বিরুদ্ধে দুর্ব্যবহার, শ্লীলতাহানির অভিযোগ

সিনেমা ঘিরে রণক্ষেত্র যাদবপুর, এবিভিপি-র সঙ্গে পড়ুয়াদের হাতাহাতি, বহিরাগতদের বিরুদ্ধে দুর্ব্যবহার, শ্লীলতাহানির অভিযোগ

কলকাতা: এবিভিপি-র সিনেমা ঘিরে রণক্ষেত্র যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয়। আয়োজকদের সঙ্গে পড়ুয়াদের হাতাহাতি। আহত বেশ কয়েকজন। বহিরাগতদের বিরুদ্ধে দুর্বব্যবহার, শ্লীলতাহানির


हिंदुस्तान की सरजमीं पर सबसे बड़े बजरंगी कीतस्वीर अपने दिमाग में तान लीजिये तो समझ लीजिये कि अगले अमेरिकी राष्ट्रपति वे ही हैं और यह इसलिए कि अमेरिका की सबसे ताकतवर जायनी लाबी डोनाल्ड ट्रंप के साथ मजबूती के साथ मैदान में हैं और वे ही रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार हैं और उनके जीत जाने की प्रबल संभावना है क्योंकि नस्लवाद के खिलाफ अमेरिकी लोकतंत्र के गौरवशाली इतिहास को तिलांजजलि देने वाले कुक्लाक्स क्लान का अमेरिका में वैसा ही पुनरूत्थान हुआ है जैसे भारत में हिंदुत्व का।


उनके धुर विरोधी रहे भारतीय मूल के बॉबी जिंदल ने कहा कि, 'यदि ट्रंप रिपब्लिकन उम्मीदवार बनते हैं, तो वह उन्ही को वोट देंगे. जिंदल ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि, ट्रंप को लेकर मै खुश नहीं हूँ, लेकिन वें हिलेरी क्लिंटन से तो बेहतर ही है।


अब समझ लीजिये कि इस आकाशगंगा के बाहर तीन तीन ग्रहों में जीवन की खोज क्यों जरुरी है और क्यों यह पृथ्वी अब रहने लायक नहीं है।अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए होने वाला मुकाबला न्यू यॉर्क के 2 निवासियों, रीयल एस्टेट क्षेत्र के दिग्गजडॉनल्ड ट्रंप और पूर्व विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन के बीच सिमट गया है। ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी लगभग हासिल कर चुके हैं और हिलरी को डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी मिलना तय है।


रॉयटर्स द्वारा गुरुवारको कराए गए एक सर्वे के मुताबिक, ट्रंप या हिलरी का समर्थन करने वाले वोटरों का कहना है कि उनका मुख्य मकसद दूसरे पक्ष को रोकना होगा। सर्वे के रिजल्ट अमेरिका में गहरा रहे वैचारिक मतभेद को दिखाते हैं, जहां लोगों में विपक्षी दलों का डर गहराता जा रहा है।


गौरतलब है कि अमेरिका के प्रेज़िडेंट बराक ओबामा ने राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी लगभग हासिल कर चुके डॉनल्ड ट्रंप और वोटरों को चेताया है कि वे इस चुनाव को गंभीरता से लें। ओबामा ने शुक्रवार को कहा, 'यह ... ओबामा ने वाइट हाउस के ब्रीफिंग रूम से अमेरिकी मीडिया और देश के लोगों से अपील की है कि वे रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डॉनल्ड ट्रंप के पूरे अतीत पर गौर करें। उन्होंने अपील की कि लोग और ... लोगों को आकर्षित करने के ट्रंप के तरीकों पर बड़ा वार करते हुए ओबामा ने कहा, 'यह मनोरंजन का विषय नहीं है और ना ही यह कोई रिऐलिटी शो है। यह अमेरिका के राष्ट्रपति पद का चुनाव है।


अरसे से आर्थिक मुद्दों को हम संबोधित नहीं कर पा रहे हैं जो हम एक दशक से लगातार करते रहे हैं क्योंरकि सामाजिक ताना बाना इस कदर टूट बिखर रहा है कि मुक्तबाजार के धर्मोन्माद के खिलाफ साझा मोर्चा बनाने की सर्वोच्च प्राथमिकता एक तरफ है तो दूसरी तरफ आर्थिक मुद्दों की समझ बहुसंखय जनगण की नहीं है जो रोजरोज अश्वमेदी वैदिकी हिंसा के शिकार हो रहे हैं और प्रबल प्रतिरोध के बावजूद मनुस्मृति मुक्तबाजार की वैश्विक व्यवस्था लगातार मजबूत होती जा रही है।


इसी बीच जेएनयू बंद कराने की मुहिम जारी है और लगातार चेताते रहे हैं कि आंदोलन का नेतृत्व सामूहिक होना चाहिए और हमारी आजादी के लिए किसी मसीहा की जरुरत नहीं है।


मसीहा निर्माण और मूर्ति पूजा की रस्म अदायगी की निरंतरता में हम लगातार पांव तले जमीन खो रहे हैं और कयामती मंजर में सांस के लिए छटफटा रहे जल बिन मछली की तरह रोजमर्रे की जिंदगी नर्क होती जा रही है।


जेएनयू में मनुस्मृति के खिलाफ अभूतपूर्व गोलबंदी देशभर में संक्रामक है तो दमन और उत्पीड़न का मनुस्मृति तंत्र उससे ज्यादा मजबूत होता जा रहा है।


एकदम ताजा मसला जो सबसे भयंकर है ,वह बंगाल का केसरियाकरण है और सत्ता हस्तांतरण के जरिये जमींदारियों और रियासतों के वारिशान को को हमने जो सत्ता का सिरमौर बना दिया है,उसके पीछे तमाम ताकतें बंगाल से ही संगठित हुई थीं और भारत विभाजन की कथा बांचते हुए नेताजी के अंतिम भाषण बार बार  पोस्ट करते हुए हम अक्सर उस इतिहास की चर्चा करते रहे हैं।


बौद्धमय भारत के अवसान के बाद सबसे अंततक बंगाल में गौतम बुद्ध की क्रांति पाल वंश के पतन तक जारी रहा और पिछले करीब एक हजार साल से सरहदों के आर पार वह विरासत बंगाल की राष्ट्रीयता बनी हुई है।


ब्राह्मणवादी ताकतों ने गोलबंद होकर बारंबार भारत विभाजन की प्रक्रिया बंगाल में शुरु की तो उसका सबसे प्रबल प्रतिरोध भी बंगाल में होता रहा है और इसी के साथ आदिवासी किसान विद्रोह की निरंतरता के मध्य बंगाल सामंतवाद और साम्राज्यवाद का गढ़ लगातार बना रहा और बंगाल में ही वियतनाम आमार नाम तोमार नाम से लेकर नंदीग्राम आमार नाम तोमार नाम जैसे नारे गूंज रहे थे।


आजाद भारत में भूमि सुधार भी यहीं लागू हो पाया।बाकी देश में नहीं तो पंचायती राज की नींव भी बंगाल पड़ी।


गौरतलब यह है कि भारत में सर्वहारा वर्ग के ,मेहनतकशों के,औरतों के और दलितों वंचितों पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के असली नेता बाबासाहेब डा.भीमराव अंबेडकर को अखंड बंगाल के पूर्वी बंगाल ने संविधानसभा के लिए चुनकर भेजा था और विभाजन के बाद समाज में जाति उन्मूलन के एजंडे के तहत वर्गीय ध्रूवीकरण की प्रकिया भी  यहीं शुरु हुई थी।


17 मई को बेरोजगार हो जाने के बाद बिना छत जीने की चुनौती के बावजूद हम अभी इसी बंगाल में बने रहने का फैसला सिर्फ इसीलिे किया कि खुले तौर पर बंगाल में संघ परिवार का समर्थन कोई नहीं कर रहा है और इसीलए हमारे हर पोस्ट के साथ यह चुनौती नत्थी है कि संघ परिवार चाहे सारी ताकत झोंक दें ,वब बंगाल हरगिज जीत नहीं सकता।


लेकिन बंगाल में सत्ता पर काबिज तबके ने सत्ता में बने रहने की जुगत में बंगाल में जो केसरिया सुनामी पैदा की है,उसका नतीजा यह कि मतदान खत्म होते न होते चुनावी हिंसा के मध्य एक फिल्म का यादवपुर विश्वविद्यालय में प्रदर्शन का विरोध करने की प्रतिक्रिया में फिर विद्यार्थी परिषद ने यादवपुर विश्वविद्यालय पर धावा बोल दिया।


गौरतलब है कि जेएनयू के साथ खडा होने के जुर्म में शाट डाउन जेएनयू की तर्ज पर शाट डाउन यादवपुर अभियान संघ परिवार ने चलाया और उस दौरान यादवपुर विश्वविद्यालय में हमला हुआ तो बजरंगियों ने फिर जुलूस निकाल कर यादवपुर पर धावा बोलने की कोशिश की तो चारों तरफ से जुलूस निकालकर इसके मुकाबले की तैयारी देख पुलिस की पहरेदारी में वे मैदान छोड़कर बाहर निकले।


बजरंगियों का हौसला बुलंद होने की ताजा वजह सत्ता दल के समर्थन में जारी एक एक्जिट पोल है,जिसमें दीदी के 183 सीटों के साथ सत्ता में वापसी का दावा किया गया और भाजपा के खाते में नौ सीटें डाल दी गयीं,जिसकी उम्मीद बजरंगियों को कतई नहीं थी।


मोदी दीदी गठबंधन की वजह से पिछले पांच साल के दौरान बंगाल का भीतर ही भीतर जबर्दस्त केसरियाकरण हुआ है और उत्तरबंगाल में सूपड़ा साफ होते देख केसरिया सुनामी के जरिये सत्ता में वापसी की जुगत में भाजपा को सीटों की खैरात के साथ खुल्ला खेलने का जो मौका दिया गया,उससे दक्षिण  बंगाल में कमसकम बीस फीसद वोट भाजपा के हक में गिरे ताकि वाम कांग्रेस गठबंधन को हराकर यूपी को नये सिरे से केसरिया बनाने का राजमार्ग खुले।


दावे के मुताबिक सीटें भले दीदी को या उनकी अंतरंग सहयोगी भाजपा को उतनी न मिले,लेकिन वोटों के हिसाब से भाजपा की ताकत बंगाल में भी अब भयंकर है और जेएनयू में जब आमरण अनशन जारी  है,तब फिर यादवपुर विश्वविद्यालय पर हमला आने वाले खतरनाक दिनों की दस्तक है।


इससे ज्यादा खतरनाक तथ्य यह है कि सत्ता वर्ग और सत्तादल ,दोनों का सार्विक केसरियाकरण हो गया है और बाकी देश बंगाल को अभी धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील मान रहा है जबकि प्रतिरोध का अंतिम द्वीप भी बेदखल होने जा रहा है।


केसरिया सुनामी के शिकंजे में बुरी तरह फंसा है बंगाल और बाकी देश के लिए यह डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने  की खबर से ज्यादा बुरी खबर है कि सत्तापक्ष को वोट देने वाला बंगाल का हर शख्स अब हिंदुत्व के कसरिया रंग से रंगकर बजरंगी है ।


इसी बीच हमारे गृहप्रदेश उत्तराखंड में दावानल से सुलगते पिघलते ग्लेशियरों से घिरने के बावजूद फिलहाल अच्छी खबर यह है कि राष्ट्रपति शासन को चुनौती अभी बरकरार है,नेनीताल हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति के फसैले को खारिज करने का ऐतिहासिक फैसला किया तो केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की अपील की।


मुख्यमंत्री हरीश रावत की बहाली भी हाईकोर्ट ने कर दी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन जारी रखते हुए हरीश रावत को विधानसभा में बुमत साबित करने का मौका दे दिया और पिछले दरवाजे से संघ परिवार को उत्तराखंड में सरकार बनाने का मौका नहीं दिया।भले ही हरीश रावत शक्ति परीक्षण में हार जायें,इससे फासिज्म के राजकाज को न्यायालय में चुनौती देने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।


इसी तरह ओड़ीशा में हाईकोर्ट ने जमीन के मामले में आदिवासियों के हक में ही फैसला किया है तो सिंगुर मामले में हुए सौदे का खुलासा करने वाला फैसले का सुप्रीम कोर्ट में इंतजार है।


संसद और विधानसभाओं में पांच साल में हजार गुणा संपत्ति बढ़ानेवाले सत्तावर्ग के चुने हुए फर्जी जनप्रतिनिधियों के राजकाज मनुस्मृति शासन में न्यायपालिका अभी जिंदा होने का सबूत यदा कदा दे रही है तो जाहिर है कि जल जंगल जमीन नागरिकता और मानवाधिकार की लड़ाई अभी बाकी है।


यह लड़ाई जेएनयू में जैसे लडी जा रही है वेसै ही यह लड़ाई बंगाल के तमाम विश्वविद्यालयों और बाकी देशके विश्वविद्यालयों और दूसरे शैक्षणिक संस्थानों में लडी जा रही है।जाहिर है कि देशी विदेशी पूंजी,मुक्त बाजार और रंग बिरंगे वैश्विक फासीवादी मनुस्मृति रंगभेदी स्थाई बंदोबस्त के खिलाफ हमारे पुरखों की लड़ाई अभी खत्म हुई नहीं है।


महात्मा गौतम बुद्ध की क्रांति से पहले शूद्रों को कोई अधिकार नहीं था और तब भी समाज में वर्ग मौजीद थे।वर्ण व्यवस्था के तिलिस्म को तोड़कर राजकुमार सिद्धार्थ ने जो वर्गीय ध्रूवीकरण के धम्म का प्रवर्तन किया तो समता और न्याय के लिए क्राति भी उन्होंने कर दी।


बुद्धं शरणं गच्छामि के उच्चारण से तब वर्णव्यवस्था खत्म करके महात्मा गौतम बुद्ध ने तब पूरे समाज और देश ही नहीं ,समुची दुनिया में अमन चैन का रास्ता बना दिया जो आज बी किसी न किसी रुप में मौजूद है।


धम्म और पंचशील का रास्ता उतना आसान भी नहीं है और गौतम बुद्ध ने अचानक अवतार लेकर समता और न्याय की लड़ाई का यह रास्ता तैयार नहीं किया था तो जाहिर है कि समता और न्याय के खिलाप यह लड़ाई अब बेहद लंबी होगी और जेएनयू यादवपुर जैसे प्रतिरोध का सिलसिला बना रहा तो हम भी कभी न कभी देश दुनिया को जोड़कर समता और न्याय की मंजिल हासिल कर लेंगे।


The time is now.

When the communal corporate fascist attack comes down right to the students, they revolt back. Until now, the supporters of AVBP in our campus hiding under platforms should reveal themselves and come out for political fight. If you and your leader, Rupa Ganguly, knows how to save the molesters with creating a chaos in our university, we know how to give you a strong resistance. And as for that 'stupid' movie drawing analogy of Jawan and Naxalites, you should feel remorse of your act which killed Rohith, Jisha and so many dalit students with institutional murders and rapes. We won't let any political party come and dictate our autonomy with their vested interest and we will keep on giving this much amount of resistance and more.

Be prepared for a war, a national war, against communalism, fascism and moral policing and mob lynching and patriarchal domination.

Resist saffronisation of campus!

HCU se, JNU se, DU se, JU se, AMU, Bharat se hallabol!

BJP-AVBP-RSS pe hallabol!

Inquilaab Zindabaad!

‪#‎ResistAVBP‬

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Arumita Mitra's photo.


মাত্র মাস দুই আগেই ওরা এসেছিলো... চোখে চোখ রেখেই সেদিন আমরা বুঝিয়ে দিয়েছিলাম, আর এক পাও বাড়ালে এই ব্যারিকেড এই মিছিল আগুন হয়ে উঠতে জানে। বন্ধু লড়াই শুরু হয়ে গেছে আগেই... যেদিন রোহিথের মৃতদেহ পাওয়া গেছিলো ইউনিভার্সিটির ভেতরে, যেদিন আপামর ভারতবাসী পড়েছিল একটা সুইসাইড নোট "my birth is an accident…", যেদিন জে এন ইউ থেকে ওদের মদতে তুলে নিয়ে গেলো কানহাইয়া-উমর-অনির্বাণদের, যেদিন ওরা আমাদের দাগিয়ে দিল আমরা দেশদ্রোহী বলে...লড়াই সেদিন থেকেই চলছে। রাস্তা ঘাটে মাঠে ময়দানে তত্ত্বে তর্কে আড্ডায় বারবার ঘুরে ফিরে এসেছে এই সংঘর্ষের কথা। আর এস এস- এবিভিপি-থিঙ্ক ইন্ডিয়া-সঙ্ঘ সব একসারিতে বসানো যায়... কারণ মোদ্দা এক কথাই বলে... ওরাই শেখায় প্রতিবেশী বন্ধুটির আর একটা পরিচয় সে 'মুসলিম' কিংবা স্ট্যান্ডের কোনায় আলু চপ বিক্রী করা ঐ দাদাটা আসলে মেথর... ওরা শেখায় "যো রামকা নেহি, ও কিসি কামকা নেহি"... ওরাই দেখিয়েছে কিভাবে গ্রামকে গ্রাম মানুষ পুড়িয়ে ফেলা যায়, বিধর্মী মেয়েকে ধর্ষণ করা যায়, বিধর্মীর ভ্রূণ ত্রিশূলের ডগায় নাচানো যায়... ওরা শিখিয়েছে কিভাবে ক্যাম্পাসগুলোতে বিভাজন করা যায় ছাত্র-ছাত্রীদের মধ্যে... কিভাবে গরু খেলে হোস্টেল থেকে পুলিশ তুলে নিয়ে যায় এমনকি পিটিয়ে মেরেও ফেলা যায়... ওরা দেখিয়েছে দলিত দম্পতিকে নগ্ন করে ঘোরানো যায় প্রকাশ্য রাস্তায়, দলিত শিশুকে জীবন্ত পুড়িয়ে মারা যায়... আজ আবার ওরা আসছে আমাদের যাদবপুরের মাঠে, আমাদের প্রতিরোধ কে বিকৃত করে সিনেমায় দেখাতে... আমরা অনেক দেখেছি, অনেক কিছুই দেখে চলেছি, কিন্তু আর না... ওদিকে রোহিথের সাথীরা লড়ছে, সেদিকে না খেয়ে জেএনইউ তে সাথীরা ওদের নামানো আগ্রাসনের বিরুদ্ধে লড়ছে... কাশ্মীর লড়ছে... আসামের ছাত্রছাত্রীরা লড়ছে... আমরাও লড়ছি লড়বো...আমাদের যাদবপুরের চৌহদ্দিকে বাঁচাবো আমরা আমাদের প্রতিরোধ দিয়ে-চিন্তন দিয়ে- সৃজনশীলতা দিয়ে- আদর্শ দিয়ে। ওদের জায়গা হবে না যাদবপুরে... এটা আজ আমরা শেখাবো ওদের। তাই সকলে চলে এসো আজ বিকেল চারটের সময়, ক্যাম্পাসে দেখা হচ্ছে।

যাদবপুর শিক্ষা দেয় ডাক পাঠায় আঘাত যদি নেমে আসে পাল্টা আঘাত ফিরিয়ে দাও...

Anjan Mayra Samir Rana Tanumoy Karmakar Anupam Halder Titir Chakraborty Anit Debnath Joy Dip Joy Ghosh Chandrodoy Mondal Priyasmita Hokkolorob Debojyoti Sarkar Ayan Chakraborty Ayan Mandal Sayantan Mukhuty Aniket Chatterjee Sampa Oraon Sumita Sumi SumIta Bose Chaudhuri Suman Rajak Juni Ghosh Trishnika Bhowmick

https://www.facebook.com/events/991156614265044/

MAY6

Interested

Rise Against Fascism

Fri 4 PM · Science-Arts More, Jadavpur University


इसलिए सभी तबकों के लोगों को साथ लेकर साझे टूल्हे की विरासत के मुताबिक पासिज्म के खिलाफ सारी शक्तियों को भारत ही नहीं,विश्वभर में लामबंद करना हमारा अनिवार्य कार्यभार है।


गौरतलब है कि टेड क्रूज़ ने डोनाल्ड ट्रंप का रास्ता साफ कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार क्रूज़ रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी हासिल करने की दौड़ से हट गए हैं। खबर है कि इंडियाना प्राइमरी में डोनाल्ड ट्रंप के हाथों हार का सामना करने के बाद टेड क्रूज ने राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी से हटने की निर्णय लिया है। टेड क्रूज़ के इस कदम से न्यूयॉर्क के बिज़नेसमैन डोनाल्ड ट्रंप का रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर मुहर लगना अब लगभग तय माना जा रहा है।


जाहिर है कि अमेरिका में कुछ ऐसा हुआ है, जिसके बारे में कुछ महीने पहले सोचना भी नामुमकिन था। डोनाल्ड ट्रंप सचमुच राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार बन जाएंगे, इसका भरोसा शायद उनको भी नहीं होगा। लेकिन अब इसकी सिर्फ औपचारिक घोषणा ही बाकी है। उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया के तहत इंडियाना राज्य में उन्होंने निटकतम प्रतिद्वंद्वी टेड क्रूज को 15 फीसदी वोटों के अंतर से हराया। इसके बाद क्रूज ने उम्मीदवारी की दौड़ से हटने का एलान कर दिया। हालांकि जॉन कसिच अभी भी मैदान में हैं, लेकिन ट्रंफ से उनका फासला इतना चौड़ा है कि उसके पटने की संभावना नहीं है। न्यूयॉर्क के अरबपति व्यापारी ट्रंप कभी किसी सरकारी पद पर नहीं रहे। उम्मीदवारी की होड़ के दौरान उन्होंने विदेशी विरोधी एवं इस्लाम विरोधी उग्रवादी बातें कहीं। अमेरिका को वे विश्व मामलों से अलग-थलग करना चाहते हैँ। चीन के घोर विरोधी हैं, जबकि रूस के अधिनायकवादी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन की खुलेआम प्रशंसा करते हैं।

"अमेरिका को फिर महान बनाने" का सपना उन्होंने देश के धुर दक्षिणपंथी और कंजरवेटिव जन-समूहों को दिखाया है। मगर ऐसा कैसे करेंगे, इसका कोई ठोस एजेंडा सामने नहीं रखा है। उनके बेकाबू अंदाज का असर यह है कि क्लिंटन परिवार एवं डेमोक्रेटिक पार्टी के खिलाफ अभियानों में करोड़ों डॉलर खर्च करने वाले अरबपति उद्योगपति चार्ल्स कोच ने अब संकेत दिया है कि ट्रंप के मुकाबले वे हिलेरी क्लिंटन को ह्वाइट हाउस में देखना पसंद करेंगे। ऐसे बयान कई परंपरावादी रिपब्लिकन नेताओं ने भी दिए हैं।

इसी कारण इंडियाना में ट्रंप की जीत के बाद कंजरवेटिव थिंक टैंक इथिक्स एंड पब्लिक पॉलिसी सेंटर से जुड़े विश्लेषक हेनरी ऑलसेन ने कहा- "मैं एक 160 साल पुरानी राजनीतिक पार्टी को आत्म-हत्या करते देख रहा हूं।" चूंकि अब यह भी लगभग है कि मध्यमार्गी मानी जाने वालीं हिलेरी क्लिंटन डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार होंगी, तो यह संभावना प्रबल हो गई है कि रिपब्लिकन पार्टी का एक बड़ा तबका नवंबर में होने वाले चुनाव में उनकी तरफ चला जाए। इस बीच यह चर्चा अभी जारी है कि रिपब्लिकन पार्टी का एक धड़ा अपना अलग उम्मीदवार मैदान में उतार सकता है। ये तमाम आकलन ट्रंप के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। मगर ट्रंप ऐसे विश्लेषणों के आधार पर उम्मीदवार नहीं बने हैं। जो तूफान वे रिपब्लिकन पार्टी में ले आए, वैसा ही नज़ारा वे राष्ट्रपति चुनाव में नहीं बना देंगे- यह अभी कोई पूरे भरोसे से नहीं कह सकता।



डोनाल्ड ट्रंप इंडियाना प्राइमरी चुनाव में जीत का परचम लहराने के साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति पद के चुनाव में संभावित रिपब्लिकन उम्मीदवार बन गए हैं। ट्रंप ने जब राजनीति में कदम रखा था और पिछले वर्ष जून में राष्ट्रपति पद के चुनाव में पार्टी उम्मीदवार बनने की अपनी दावेदारी पेश की थी तब किसी राजनीतिक विशेषज्ञ ने यह नहीं सोचा था कि वह इस दौड में इतना आगे पहुंच जाएंगे।


ट्रंप ने इंडियाना प्राइमरी चुनाव जीतने के बाद अपने समर्थकों से कहा, ''मैं रिपब्लिकन पार्टी का संभावित उम्मीदवार बनकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं. यह हमारी पार्टी को एकजुट करने और हिलेरी क्लिंटन को शिकस्त देने का समय है।' ट्रंप को 52 प्रतिशत से भी अधिक मत मिले. उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी सीनेटर टेड क्रूज उनसे 16 अंकों से भी अधिक के अंतर से पीछे रहे। क्रूज ने बाद में रिपब्लिकन उम्मीदवार बनने की दौड से अपनी दावेदारी वापस लेने की घोषणा की। इसके कुछ ही देर बाद रिपब्लिकन नेशनल कमेटी (आरएनसी) के अध्यक्ष्य रींसे प्रीबस ने कहा कि ट्रंप संभावित उम्मीदवार होंगे।


बहरहाल अपनी ही पार्टी में डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता कम हैं। इससे पहले क्रूज़ ने ट्रंप को झूठा बताया था और कहा था कि वह राष्ट्रपति बनने लायक नहीं हैं। जैसे ही इंडियाना में नतीजे सामने आने लगे क्रूज़ के सलाहकारों ने कहा कि ट्रंप को उम्मीदवारी की रेस में रोकना कठिन है। वोटरों ने हमपर उम्मीद नहीं जताई है। क्रूज़ ने कहा है कि वो बिना मन के देश के भविष्य को लेकर सकारात्मक सोच के साथ अपने प्रचार को आगे नहीं बढा रहे हैं और अपना प्रचार यहीं रोक रहे हैं।


गौरतलब है कि मंगलवार को क्रूज़ और ट्रंप के बीच ज़ुबानी जंग और तीखी हो गई थी जब क्रूज़ ने ट्रंप पर हमला करते हुए उन्हें पूरी तरह से नीतिहीन और झूठा करार दिया था। ट्रंप ने जवाब में कहा था कि टेड क्रूज़ अपने नाकाम अभियान को बचाने के दौरान हताश हो गए हैं।


Indomitable Jadavpur (অপরাজেয় যাদবপুর)


Yesterday Jadavpur University faced an unprecedented attack on its campus and the students. The ABVP arranged a program on the campus with help of few insiders to screen an upcoming movie "Buddha in a traffic Jam" by Vivek Agnihotri. Now, the movie itself a debatable one for its misrepresentation of the tribal resistance against neoliberal attacks and the attacks on Dalits on behalf of the state. However, the students of JU, did not have a problem in screening of the particular film as the community largely believes in democratic space of the campus and the right to freedom of speech. The students arranged a different screening to show 'Muzaffarnagar Baki Hein'. But at the start of the ABVP arranged event, we suddenly saw a rush of outsiders into the campus and when the students came up with their criticism towards Vivek's role in current past to defend the central government's various fascist attacks on the people, they were attacked by the outsider ABVP goons. The female students including a female journalist got molested, they were threatened and sexually abused. They also tried to stop the screening of "Muzaffarnagar" as it is 'anti-national' according to their ideas. Not only that, when the students retaliated and caught four of the alleged molestors and decided to hand them over to police, again hundreds of RSS BJP cadres gathered outside the campus and constantly threatened the officials and the students.

This is happening in the same pattern as we witnessed in JNU, HCU and FTII. The students of this country are facing the fascist rage directly and since they are trying to confront their ideas and challenging their role in education, so the students everywhere in this country are getting threatened, beaten up even murdered. We have not forgotten the institutional murder of Rohith or the false victimization of the students in JNU. Today, JU is also facing same kind of planned fascist attacks on its autonomous space,

So we appeal the student community of this state to join us in a RALLY, tomorrow(7th may), 5 pm, gather in JU Playground to protest against such kind of fascist makeover of the educational institutions.

Aritra Anto-bihin's photo.

ভিভেক অগ্নিহোত্রী আপনি তো সাধারণ ছাত্রছাত্রীদের শান্তিপূর্ণ ঘেরাও, বিক্ষোভ এ ভয় পেয়ে গিয়ে লেজ গুটিয়ে গাড়ীর ভেতরেই বসে রইলেন, সেই মাঠে গিয়ে ABVP'র চামচা দের নিরাপত্তায় গাড়ি থেকে নামলেন। তারপর, চলে যাওয়ার সময় ও তো মাঠ থেকে পায়ে হেঁটে বেড়ানোর হিম্মত নেই তাই মাঠে গাড়ি ঢুকিয়ে তাতে চেপে পালালেন। আর এখন twitter এ ঢপ মারছেন যে আপনার কাঁধ ভেঙ্গে দিয়েছে স্টুডেন্টরা, আপনার গাড়ি ভেঙ্গে দিয়েছে স্টুডেন্টরা? Buddha in a traffic jam এর মতো ভাঁটের ছবি তৈরির সাথে সাথে ঢপ এর ব্যাবসাও করেন নাকি মশাই?



Suswagata Poria's photo.

Suswagata Poria

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Imagine scorching temperature of 40 degree plus, imagine remaining hungry for a day, and then imagine 9 full days of hunger strike (and continuing) during atrocious summer weather. Could most of us have the will or capacity to do this consciously? Yet, so many students at JNU in Delhi are on hunger strike against the unfair punishment meted out by the University administration against progressive students. Rather than be worried about the welfare of ailing students, the VC has been making one arrogant gesture after another calling hunger strike "unlawful" (forgetting that hunger strikes were most prominent tools used against unjust laws and rule by Indian nationalist movement and forgetting that this is a form of protest common in many democracies) and almost mocking the students.

Let me make it frank, I do not have the courage to do what these young students are doing. I would be lying if I said my solidarity includes simulating their experience. I cannot. I cannot even bear a tiny percentage of pain they are bearing. I don't think most of us can. The least we can do is appreciate their courage and resilience. The least we can do is respect their struggle and hope for their victory (and as Sushmita Verma points out, avoid misplaced criticism - https://www.facebook.com/notes/sushmita-verma/failing-health-of-students-and-misplaced-criticism-by-some-quarters-/10156938725690441).

Hope for a better world in otherwise nasty cruel world comes from such brave individuals willing to imagine, work, protest, mobilise and not give up. This is what radical democracy looks like (https://www.youtube.com/watch… viaAzhar Amim). Not what many of us in academia write about without ever sweating for a second.

(Pic via https://www.facebook.com/photo.php?fbid=1120234888040575&set=ms.c.eJxFzlkORFEERdEZVfSH~_U~_s8gj3d4UNs5CoqRkIUvHjAUcDdEErySjEHswK30qyQkvrQHuFaSG4gWQB1I24Ccwffn9EdVRyIfNrOPygBuxNdMP2ivNMmD34oomNOk3U~%3BQ~_poDYC.bps.a.1120234068040657.1073741970.100001622224273&type=3&theater)

Dibyesh Anand's photo.


Samim Asgor Ali's photo.

Samim Asgor Ali's photo.

Samim Asgor Ali's photo.

Samim Asgor Ali's photo.

Samim Asgor Ali's photo.

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