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Tuesday, May 7, 2013

आम लोगों को मुावजा मिले न मिले, राज्य तो अराजक हिंसा के चपेट में आ गया। लाखों एजंटों को बचाने की चुनौती!

आम लोगों को मुावजा मिले न मिले, राज्य तो अराजक हिंसा के चपेट में आ गया। लाखों एजंटों को बचाने की चुनौती!


एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​


शारदा फर्जीवाड़े के भंडाफोड़ से जो  छोटी बड़ी सैकड़ों कंपनियां आम लोगो की जमा पूंजी पर इतने वर्षों से दिन दहाड़े डाका डालती रहीं हैं, उन सबका खुलासा होने से मुश्किल में है पूरी राजनीतिक जमात।इसका भयावह नतीजा सामने आने लगा है। अपने बचाव में राजनीतिक दल दिनों दिन उग्र तरीके अख्तियार करने लगे हैं, तो आम लोगों में इन सभी कंपनियों का गुस्सा फूटने लगा है। एजंट जो आम निवेशकों के साथ अब तक आंदोलन कर रहे हैं, उनके लिए अब अपनी जान बचाना मुश्किल हो रहा है। वे गिरफ्तार हो जायें या फिर भूमिगत, उनके परिजन जनरोष से बचने की हालत में नहीं है।


जनता किसी को बख्शने के मूड में नहीं है। सोदपुर के नाटागढ़ में गिरफ्तारी  के बाद जमानत पर रिहा एजंट के भूमिगत हो जाने से कहर टूट पड़ा उनके मां बारप भाई , भाभी और दूसरे परिजनों ने। महिलाओं के हाथों बुरी तरह अपमानित, पिटे जाने के बाद बाप ने तो आत्महत्या कर ली है। आत्महत्याएं और हत्याओं तक का सिलसिला अब सुर्खियों में हैं।सोमवार को उत्तरी 24 परगना के सोदपुर स्थित ऋषि बंकिम नगर कॉलोनी में एक चिटफंड कंपनी के एजेंट के पिता 60 वर्षीय जगदीश राय ने अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह अपने बेटे द्वारा निवेशकों के पैसे नहीं लौटा पाने और इस कारण निवेशकों द्वारा सार्वजनिक रूप से उन्हें अपमानित किए जाने को लेकर परेशान थे। चिटफंड घोटाला उजागर होने के बाद से राज्य में अब तक इन कंपनियों के दर्जन भर से ज्यादा निवेशक और एजेंट आत्महत्या कर चुके हैं।छोटी चिटफंड कंपनियों के मालिक भी आत्महत्या कर रहे हैं।यह क्रम टूटने के अब आसार नजर नहीं आते। चिटफंड घोटाले से सोमवार को पहली बार कथित रूप से हत्या का भी एक मामला जुड़ गया। संदिग्ध लोगों ने हेलो इंडिया चिटफंड कंपनी के एक निदेशक जयंत सरकार (48 वर्ष) की रविवार की रात हुगली जिले के चुनचुड़ा स्थित उनके घर पर कथित रूप से हत्या कर दी। सरकार को उनके कमरे में फंसे से लटका पाया गया। उनकी पत्नी पपिया सरकार द्वारा  पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार तीन लोगों, कूचबिहार के अभिजीत साहा एवं अब्दुल्ला राशिद और हरिनघाटा के विप्लव विश्वास ने उनकी हत्या की है। इसके बाद वे तड़के लगभग 3 बजे फरार हो गए।दुर्गापुर में एनेक्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड नामक चिटफंड कंपनी के बाद हो जाने के बाद कटवा शाखा के सीनियर लीडर ने एजेंटों को अपना घर व संपत्ति बिक्री कर रुपया वापस लौटाने का आश्वासन दिया था। अब वे भी फरार हो गए हैं। इस कारण एजेंटों ने उनके घर पर विज्ञप्ति लगा दी है। ताकि वे किसी को घर बिक्री न कर सकें।


मुख्यमंत्री ममता  दीदी ने मैदान में उतरकर विरोधियों को सबक सिखाने अपने दागी साथियों के बचाव में जो आक्रामक रुख अख्तियार किया है , उसके खतरनाक नतीजे सामने आने लगे हैं। उत्तर चौबीस परगना में कहीं भी माकपा की बैठक न कर देने की और जुलूस के जवाब में जवाबी जुलूस निकालने की अपील कर दी इस प्रकरण में शारदा के साथ खड़ पाये गये राज्य के खाद्यमंत्री ज्योति प्रिय मल्लिक ने। तो दूसरी ओर, जगदल के विधायक ने माकपाइयों और कांग्रेसी नेताओं को देख लेने की धमकी दी है और बताया कि वे उनके इलाके में घुसेंगे तो उन्हें वे देख लेंगे।


दूसरी ओर जितनी तेज हो रही हैं राजनीतिक गतिविदियां , उतना ही पक्ष प्रतिपक्ष के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है।,शारदा चिटफंड घोटाला मामले में वाम मोर्चा का एक प्रतिनिधिमंडल सीबीआई जांच का दबाव बनाने की खातिर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को 9 मई को ज्ञापन सौंपेगा। लेफ्ट फ्रंट के अध्यक्ष बिमान बोस ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा कि प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीपीएम के वरिष्ठ नेता सूर्यकांत मिश्रा करेंगे जो विपक्ष के नेता हैं।इसी के मध्य विधानसभा के विशेष सत्र में चिट फंड विरोधी विधेयक पारित कराने के बाद सरकार उसे अब कानून के तौर पर लागू करने को लेकर तत्पर हो गई है। संबंधित मंत्रालय व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से शीघ्र अनुमोदन लेने के लिए वित्त मंत्री अमित मित्रा मुख्य सचिव संजय मित्रा व अन्य विभागीय अधिकारियों को लेकर दो दिनों तक दिल्ली में डटे रहें। मित्रा ने सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से मुलाकात कर चिट फंड विरोधी विधेयक पर जल्द ही राष्ट्रपति व संबंधित मंत्रालयों की मुहर लगाने की अपील की।


बिमान बोस  ने श्यामबाजार में मंगलवार को होने वाली रैली की अनुमति नहीं देने के लिए राज्य सरकार और पुलिस की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया, 'पहले उन्होंने अनुमति दी थी लेकिन बाद में वापस ले ली। यह तानाशाहीपूर्ण रवैया है जिससे संदेश जाता है कि केवल तृणमूल कांग्रेस को अनुमति मिलेगी विपक्षी पार्टियों को नहीं।'


ऐसी हालत में एक ओर तो एजंटों की भारी तादाद को सुरक्षा दे पाना राज्य सरकार के लिए असंभव है। सिर्फ शारदा समूह के साढ़े तीन लाख से ज्यादा एजंट हैं और रोजवैली का दावा है कि उसके बीस लाख से ज्यादा फील्ड वर्कर हैं। छोटी बड़ी सैकड़ों  चिटफंड कंपनियों के एजंटों और उनके परिजनों को सोदपुर कांड की पुनरावृत्ति से कैसे बचायेगी  सरकार, यह सवाल जहां मुंह बांए खड़ा है, वहीं राजनीतिक संघर्ष तेज होने पर अराजकता के आलम से कैसे निपटेगी सरकार, यह सवाल भी बड़ा आकार लेने लगी है। केंद्रीय वाहिनी तो दीदी तैनात करने से मना ही कर रही हैं। कैसे पंचायत चुनाव हो पायेंगे? और कैसे निपटेगी पालिका चुनाव की जिम्मेवारी? हावड़ा जिले के कोने कोने में भारी तनाव है और जनरोष लावा बनकर बहने लगा है, वहां भी संसदीय चुनाव होने हैं।


हालत यह है कि चिटफंड कंपनियों के शिकंजे में फंसे आम लोगों को उनकी अमानत लौटानी की बजाय जो लोग उनकी इस दुर्दशा के लिए सीधे जिम्मेदार हैं, उन्हें बचाना ही राज्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित होने जा रही है।डूबने के कगार पर पहुंची कंपनी जमाकर्ताओं को पैसा नहीं दे पा रही है और जमाकर्ता अपने पैसे की मांग करते हुए सड़कों उतर आए हैं।चिटफंड के खिलाफ अपनी आवाज मुखर करने वाले तृणमूल कांग्रेस सांसद सोमेन मित्रा ने कहा, 'मैंने राज्य में चिटफंड के कुकुरमुत्ते की तरह उगने के बारे में पहले ही प्रधानमंत्री को लिखा था। जिन लोगों ने इन चिटफंड में धन निवेश किया है वे गरीब लोग हैं। उन पर बहुत बुरा असर पड़ा है।'


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पूर्वोत्तर राज्यों में अपने आधार को विस्तार देने में जुटी है। पार्टी ने हाल में कांग्रेस शासित मिजोरम में अपनी एक इकाई की स्थापना की। टीएमसी पहले ही असम, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में अपनी इकाइयां स्थापित कर चुकी है। इन राज्यों में वह कई चुनावों में हिस्सा भी ले चुकी है। जहां दीदी की महात्वाकांक्ष केंद्र का तख्ता पलट देने के हैं, वहां अपने ही राज्य में बेकाबू कानून व्यवस्था की हालत में उनका राष्ट्रीय कद छोटा पड़ जाने की आशंका होने लगी है। सत्ता दल के नेता मौजूदा संकट में संयम न बरतने की जो गलती बार बार कर रहे हैं, उससे हालात तेजी से बिगड़ने लगे हैं।गौरतलब है कि टीएमसी के मणिपुर इकाई के अध्यक्ष किम गांग्टे ने यहां कहा, 'हमारी पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी मिजोरम राज्य कमेटी के सदस्यों के नामों की घोषणा करेंगी।'मणिपुर के पूर्व लोकसभा सदस्य गांग्टे ने आइजोल में मिजोरम के संभावित नेताओं और कार्यकर्ताओं से दिनभर बात की। उन्होंने कहा, 'पार्टी इस साल के अंत में होने वाले 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगी।' भारतीय पुलिस सेवा के रिटायर अधिकारी बी.टी. नघींग्लोवा मणिपुर के तृणमूल नेताओं सहित कई राजनेताओं और कार्यकर्ताओं ने बैठक में हिस्सा लिया। नघींग्लोवा को तृणमूल की मिजोरम इकाई का अध्यक्ष बनाए जाने की अधिक संभावना है।अरुणाचल विधानसभा चुनाव में बारी जीत दर्ज की है। तृणमूल ने तो असम विदानसभा में भी उपस्थिति दर्ज करायी है। अब बंगाल में ही हालत बदतर होते रहने से तो सारा खेल गुड़गोबर हो जाने की आशंका है।

​और डर है कि हालात नियंत्रण से बाहर चले जाएंगे। मसलन दीदी की जनसभा के बाद कोलकाता के श्याम बाजार में जवाबी सभा की इजाजत माकपा को नहीं मिली , फिर  भी सभा हुी। अन्यत्र ऐसी परिस्थिति बनी तो उसके खतरनाक नतीजे बी सामने आसकते हैं। प्रतिपक्ष का तेवर भी समान आक्रामक है और किसी भी तरफ से अपने नेताओं कार्यकर्ताओं को रोकने की कवायद हो नहीं रही। सभी अपना जनाधार को लेकर फिक्रमंद हैं, पर इस रस्साकशी में लोग जो आत्महत्या कर रहे हैं, रोजाना जो हत्या की वारदातें हो रही हैं, बच्चे और महिलाएं जो अनाथ हो रहे हैं, परिवारों का बसेरा उजड़ रहा है और आम जनता जो पिस रही है, उससे राजनीति एकदम बेपरवाह है।


पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले में चिटफंड कंपनी के एक और एजेंट ने जहर खाकर आत्महत्या  कर लिया है। शारदा समूह की धोखाधड़ी उजागर होने के बाद खुदकुशी करने वाले निवेशकों और एजेंटों की संख्या बढ़कर अब नौ हो गई है।पुलिस सूत्रों ने बताया कि बशीरहाट पुलिस थाने के अंतर्गत पड़ने वाले संग्रामपुर गांव का निवासी मृणाल कांति मंडल (42) एक चिटफंड कंपनी में बतौर एजेंट काम करता था। कंपनी के निवेशक उससे अपना पैसा लौटाने की मांग कर रहे थे और इस कारण वह काफी दबाव में था। सूत्रों ने बताया कि निवेशकों का धन लौटाने में अक्षम रहने पर मंडल ने रविवार की रात जहर खा लिया, जिस कारण मंगलवार को अस्पताल में उसकी मौत हो गई।



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